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मैदान में डटी कांग्रेस, भाजपा रही है हांफ।* *दोनों के वोट बैंक पर झाड़ू लगाएगी “आप”

2023 के मध्य में छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसको लेकर सरगर्मियां तेज होनी शुरू हो गई है। राजनीतिक बिसात बिछाई जा रही है। परंतु इस बार यहा का चुनावी नजारा बिल्कुल ही अलग दिखाई देगा। यहा परंपरागत विरोधी भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने तो होंगे ही साथ ही दिल्ली-पंजाब में झाड़ू लगाकर भाजपा-कांग्रेस को साफ करने वाली आम आदमी पार्टी भी अपने नए तेवर के साथ रण में उतरती दिखेगी। उनके केंद्रीय नेतृत्व ने इशारों मे बता दिया है कि वे अब अपनी पूरी ताकत छत्तीसगढ़ में झोकने जा रहे है।

गौरतलब है कि, 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां 68 सीटें प्राप्त करते हुए प्रचंड जीत हासिल की थी और 15 साल तक सत्ताधीश रहे डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस बड़ी जीत के बाद कांग्रेस ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया और प्रदेश की बागडोर सौंपी। आज भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बने साढ़े 3 साल हो गए हैं। बड़े ही आराम के साथ निर्बाध गति से उनकी सरकार चल रही है। पर बड़े आश्चर्य की बात है कि 15 साल सत्ता में रहने वाली भाजपा विपक्ष में आने के बाद हाथ पर हाथ धरे ही बैठी हुई है। लोकहित के कई मुद्दों पर कांग्रेस सरकार ने गलत कार्य किया है परंतु उनके कार्यों पर रोक लगाने के लिए ताकत के साथ आवाज उठाने की हिम्मत भाजपा दिखा नहीं पाई है।

छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार जाने के बाद भाजपा में अब तक तीन प्रदेश अध्यक्ष बदले जा चुके हैं। जिस धर्मलाल कौशिक के नेतृत्व में यहा भाजपा का बुरा हश्र हुआ उसके ही सिर पर नेता प्रतिपक्ष का ताज रख दिया गया। उसके बाद विक्रम उसेंडी प्रदेश अध्यक्ष बने पश्चात पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी सम्हाले हुए है। परंतु सुस्त भाजपा संगठन में जोश भरने ये तीनों ही प्रदेश अध्यक्ष नाकाम रहे हैं। भाजपा में प्रदेश से लेकर जिला, मंडल संगठन तक हर तरफ अफरा-तफरी और निराशा का वातावरण है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को यह समझ नहीं आ रहा है आखिर उनकी पार्टी में हो क्या रहा है। कोई कुछ भी कहने में बताने में असहज, असमर्थ ही जान पड़ता है। आज सड़क हो या सदन कही भी कांग्रेस सरकार को घेरने में भाजपा असफल ही है। वहीं दूसरी तरफ जिस प्रदेशाध्यक्ष अध्यक्ष भुपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद विधायक मोहन मरकाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने। सत्ता के प्रभाव से कोसों दूर रहते हुए मोहन मरकाम आज छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में जाकर हर ब्लॉक और जिले में बैठक लेकर कांग्रेस को और मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। ऐसे में कह सकते हैं कि कांग्रेसी पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान मैं उतरेगी। वही आम आदमी पार्टी भी पूरे जोश खरोश के साथ 2023 के चुनावी रण में उतरेगी। प्रदेश अध्यक्ष कोमल उपेंडी अपनी पार्टी को मजबूत बनाने प्रदेश भर में अभियान छेड़े हुए हैं। पंजाब से राज्यसभा सांसद बने मुंगेली छत्तीसगढ़ के निवासी आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर रहे डॉ. संदीप पाठक को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की संभावना प्रबल जान पड़ रही है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ डॉ. संकेत ठाकुर एवं पत्रकार उचित शर्मा भी बतौर मार्गदर्शक बड़ी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।

आगामी चुनाव की दृष्टि से कांग्रेस पार्टी सोशल इंजीनियरिंग में ज्यादा ध्यान दे रही है। वैसे भी उनकी सरकार के पास साढ़े तीन साल की उपलब्धियां बताने के लिए कुछ खास नही है। बल्कि प्रदेश भर में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता के बीच कांग्रेस सरकार की छवि बेहद खराब हो गई है। पर उनके लिए यह सुखद बात है कि विपक्षी भाजपा सत्ता जाने के बाद अभी तक होश में आई नहीं है या यूं कहें वह कोमा में है जिसका लाभ निश्चित तौर पर कांग्रेसी उठाने की तैयारी कर रही है। परंतु पंजाब में एकतरफा जीत हासिल करने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज आम आदमी पार्टी पूरे दमखम के साथ छत्तीसगढ़ का आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी ऐसी उनकी तैयारी दिख रही है। पिछले बार प्रदेश संगठन को फ्री हैंड छोड़कर चुनाव लड़या गया था परंतु इस बार आप पार्टी के केंद्रीय नेता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया, गोपाल राय छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि प्रत्येक बूथ स्तर पर 5-5 कार्यकर्ताओं को अभी से जिम्मेदारी सौंप दी गई।

आप यह सोच रहे होंगे कि मैंने बहुजन समाज पार्टी और जोगी कांग्रेस का जिक्र क्यों नहीं किया। तो मैं आपको बता दूं कि मेरी नज़रों में बहुजन समाज पार्टी और जोगी कांग्रेस का वोट पूरी तरह बिखरता नजर आ रहा है। पिता स्व. अजीत जोगी की तरह अमित जोगी में वह ताकत नहीं है कि अपनी पार्टी को आगे लेकर जा सके और बसपा अब तक की सबसे कमजोर स्थिति में है।

मुझे लगता है आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी तुरूप का इक्का साबित होगी। कई रिटायर्ड अधिकारी इस पार्टी की सदस्यता लेने जा रहे हैं साथ ही कांग्रेस – भाजपा के उपेक्षित नेताओं पर भी आम आदमी पार्टी डोरे डाल रही है। कांग्रेस का परंपरागत मुस्लिम वोट,कुछ जातिगत वोट और भाजपा का हिंदुत्ववादी वोट के साथ मोदी समर्थक वोट ही उनकी मजबूती है। आज की स्थिति में इस वोट बैंक को आम आदमी पार्टी चाह कर भी अपने पक्ष में नहीं कर सकती। परंतु राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार, सुरक्षा, वादाखिलाफी जैसे मुद्दे जिसे भाजपा अब तक ढंग से उठा नही पाई है को लेकर आप पार्टी दोनों दलों के अस्थाई वोटरों को अपने पक्ष में लाने सफल हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस भाजपा के लिए यह चिंता का सबब होगा।और एक नई अनदेखी चुनौतियों का सामना दोनों दलों को करना पड़ेगा।

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