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जनजातीय बोलियां खत्म होना चिंता का विषय : सीएम भूपेश बघेल

रायपुर। राजधानी रायपुर में देशभर के साहित्यकारों, विद्वानों, शोधार्थियों का आज समागम हो रहा है. आदिम जाति और अनुसूचित जाति विभाग की तरफ से राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया.

सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है. हमने तीन वर्षों में यहां की संस्कृति, पंरपराओं को बढ़ावा दिया. पहले लोग छत्तीसगढ़ आने से डरते रहे हैं. इस राज्य को नक्सल के नाम से जानते थे, लेकिन पिछले तीन साल में हमने यहां का गौरव वापस दिलाने लगातार प्रयास किया. आदिवासी महोत्सव में विदेशी कलाकार भी आए और अब लोगों की सोच में काफी बदलाव हुआ है. बहुत सी जनजातीय बोलियां ख़त्म हो रही हैं, जो कि चिंता का विषय है, छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों का जल, जंगल, जमीन बचाने प्रतिबद्ध है.

सीएम भूपेश बघेल ने आगे कहा कि 3 दिनों के इस आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के अनेक विद्वान शामिल हुए हैं. कला और साहित्य क्षेत्र में जिन लोगों ने काम किया वह सब आए हुए हैं. पहली बार छत्तीसगढ़ में इस तरह का आयोजन हो रहा है. इस आयोजन के जरिए आदिवासी क्षेत्र के साहित्य की रचना देश और दुनिया के सामने आएगी. यह आयोजन पुल का काम करेगा. छत्तीसगढ़ में 16 प्रकार की बोली और भाषा है. हमने बस्तर में पदस्थ होने वाले प्रशासनिक अफसरों को आदिवासी बोली भाषा सिखाने साहित्य बनाया है. ताकि अफसर आदिवासी की लैंग्वेज समझ सकें.

दिल्ली दौरे स्थगित होने पर सीएम बघेल ने कहा कि दिल्ली में एक बैठक थी वह अचानक कैंसिल हो गई. धार्मिक जुलूस में हुई हिंसा पर बोले कि जब भी राजनीतिक जुलूस हो या धार्मिक जुलूस निकलते हैं, और उस जुलूस को कौन लीड कर रहा है ये जान लेना चाहिए. जुलूस किसके नेतृत्व में निकला है. उसके आयोजकर्ता कौन हैं. यह सारी चीजें पता होगी तो इस प्रकार की घटना से बचा जा सकता है. गर्मियों में नक्सली वारदात बढ़ने पर कहा कि हम लोग लगातार चौकन्ने हैं. सीआरपीएफ, पुलिस सभी मुस्तैद हैं.

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