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विगत एक वर्षों से कोरोना काल के चलते सिटी बस का संचालन बंद, सिटी बस का संचालन वाहने खराब होने का हवाला दे बंद पड़ी

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  • विगत एक वर्षों से कोरोना काल के चलते सिटी बस का संचालन बंद है. लॉक डाउन की स्थिति सामान्य हो गई है सिटी बस का संचालन वाहने खराब होने का हवाला दे बंद पड़ी है.
  • सिटी बस संचालक प्रदेश भाजपा शासनकाल में जन सुविधाओं के लिए की गई थी. लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यात्रियों को सुविधा छीन ली गई है. धरसीवा से रायपुर पहुंचने सिर्फ मैजिक का सहारा रह गया है

प्रेमलाल पाल/धरसींवा : सिटी बस का संचालन क्षेत्र की जन समस्या दुर्घटना लूटपाट चाकूबाजी की घटना का शिकार हो रहे लोगों की पीड़ा से राहत देने पूर्व विधायक देवजी पटेल द्वारा हरी झंडी दिखाया था रायपुर से सगुनी और रायपुर से सिलयारी के लिए 3 से 6 बसे हर घंटे में ग्रामीणों को सुलभ हो जाया करती थी रायपुर से सिलयारी तक चलने वाली बसें सक्सेस नहीं हो पाई थी इसलिए उस रूट की बसें बंद कर दी गई. लेकिन रायपुर से सुंगेरा जो धरसीवा से हटकर अंदर 10 किलोमीटर गांव जाती थी रास्ते में कूरा पंढरभट्टा ख़ैरखुट सगुनी मुर्रा आदि अनेक गांवों के लिए वरदान साबित हुआ था सिटी बस प्रतिदिन छोटे व्यापारी दूध सब्जी राशन सामग्री लेकर गांव तक सुरक्षित पहुंच जाते थे लेकिन जब सिटी बस बंद हुआ तब से कुरा पंढरभट्टा के बीच लूटपाट की घटना आए दिन देखने को मिलती है लोग शाम ढलते व अकेले बाजार का रायपुर से आना जाना नहीं कर पाते हैं लूट जाने के डर से सिटी बस के संचालक का सबसे अच्छा लाभ विद्यार्थियों मजदूरों को मिलता था जो कम टिकट दर सुरक्षित देर सुबेरे रात्रि 9:00 बजे तक अपने घर पहुंच जाते थे.
सरकार बदलने के साथ क्षेत्रवासियों की सुविधा भी बदल गई. सिटी बस बंद हो गई यदि खराब खड़ी है तो किसी अन्य को टेंडर से सिटी बस का संचालन कराना चाहिए, बसों में व टैक्सी मैजिक ऑटो में अब वाहन स्वयं किराया निर्धारित कर अधिक राशि वसूल रहे हैं. व्यवसायिक वाहनों में परमिट के आधार पर की मनमानी व लूट पुंज व्यवस्था से आम आदमी इसका शिकार हो रहे हैं. शासन डीजल पेट्रोल में दाम बढ़ने के बाद 25 परसेंट किराए में वृद्धि की घोषणा की गई. लेकिन यहां पर रायपुर से धरसींवा के बीच चलने वाली मैजिक मे प्रति व्यक्ति ₹50 किराया वसूला जाता है, बसों में पहले ₹20 प्रति व्यक्ति रायपुर से धरसींवा तक किराया था अब ₹30 वसूला जाता है. परमिट की तो खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं, भेड़ बकरियों की तरह सवारिया ठूस ठूस कर भरी जाती है. यात्री बसे गांव से होकर गुजरने का प्रावधान है. लेकिन अधिकांश बसें बाईपास सिक्स लाइन से गुजर जाती है.

तिगुना मार यात्री को झेलना पड़ रहा है. बसे अब धरसीवा सवारी भनपुरी पर उतार रहे हैं…

पेट्रोल डीजल की कीमत पर यात्री वाहन मनमाने किराए वसूली आम जनता पर बोझ बढ़ गया था, अब बस स्टैंड पंडरी से हट जाने के बाद किराया अब तिगुना मार यात्री को झेलना पड़ रहा है. बसे अब धरसीवा सवारी भनपुरी पर उतार रहे हैं उन्हें नया बस स्टैंड जाने में यात्रियों को 15 किलोमीटर अधिक दूरी घूमने पर समय आधा घंटा समय लग रहा है. धरसीवा से रायपुर अब लोग 70 किराया अदा कर पहुंच रहे हैं. पहले धरसींवा से रायपुर ₹20 किराया था.लॉक डाउन के बाद पेट्रोल डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होने पर देसी यात्री वाहनों में ₹50 प्रति सवारी और सामान्य बसों में ₹40 किराया वसूला जाने लगा. यही हाल मैजिक यात्री वाहन का भी है.यात्री सुरक्षा की दृष्टि से बसों में सफर करना पसंद करते हैं. लेकिन आप प्रायः देखने से आ रहा है यात्री मजबूरी मैजिक में आना-जाना कर रहे हैं. ब से किराया 40-50 लेने के बाद यात्रियों को भनपुरी चौक पर उतार देते हैं और बसे रिंग रोड होकर नया बस स्टैंड पहुंच रही है यात्रियों को भनपुरी उतरने के बाद ऑटो वालों को ₹20 किराया शहर तक जाने में लग रहा है. कुल मिलाकर धरसीवा से रायपुर ₹70 किराया अदा कर पहुंच पाते हैं. कोरोना काल से सिटी बसें बंद होने छोटे व्यापारी साग सब्जी दूध वाले स्कूल छात्र-छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस प्रकार रायपुर से धरसींवा लौटने वाली यात्री नया बस स्टैंड जाने के बजाय उन्हें भनपुरी ₹20 किराया देकर आना-जाना करना पड़ रहा है. साथ ही 2 बार वाहन बदलने से छोटे व्यापारी सामान लेकर उतरने चढ़ने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सिटी बस संचालक प्रदेश भाजपा शासनकाल में जन सुविधाओं के लिए की गई थी. लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यात्रियों को सुविधा छीन ली गई है. धरसीवा से रायपुर पहुंचने सिर्फ मैजिक का सहारा रह गया है. मैजिक वालों मनमानी का शिकार आम यात्री हो रहे हैं. ऐसे मैजिक व ऑटो को परमिट जारी किया जाता है लेकिन परमिट के आधार पर कमी वाहन नहीं चलाया जाती पर दिखावे के लिए परमिट है. उसे रद्द कर देना चाहिए. क्योंकि किराया वसूलने में यात्री वाहन शासन का नियम बताते हैं लेकिन परमिट के आधार पर वाहन संचालित नहीं की जाती है. समस्या तो तब खड़ी होती है जब परमिट वाली वहां ने दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और सात परमिट वाली गाड़ी में 10 लोगों की मौत हो जाती है. ऐसी स्थिति में मुआवजे की भरपाई कर पाना असंभव हो जाता है. उपरोक्त जन समस्या को देखते हुए सिटी बस का संचालन बहाल किया जाय जिससे यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकें.

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