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राहुल गांधी ने बताया आदिवासियों को विरासत का भंडार, तो हेमंत सोरेन बोले – मैं सीएम नहीं होता, तब भी आता

रायपुर। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव-2021 के अवसर पर कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी ने संदेश भेजा है। संदेश का वाचन यहां महोत्सव के मंच पर कांग्रेस नेता व छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने किया। संदेश में राहुल गांधी ने कहा है, मैं छत्तीसगढ़ सरकार को भारत भर के आदिवासी कलाकारों को एक मंच प्रदान करने के लिए बधाई देता हूं। अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करें। मैं आप सभी का इस महत्वपूर्ण आयोजन में स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा है कि हमारे आदिवासी भाई-बहन हमारी विरासत के भंडार हैं, और हमारे प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने में सबसे आगे रहे हैं। प्रत्येक लोक गीत, नृत्य, पेंटिंग और मूर्तिकला एक अनूठी कहानी बताते हैं, और हमारे पूर्वजों की आकर्षक दुनिया में एक खिड़की प्रदान करते हैं। इन जीवित परंपराओं के माध्यम से ही समाज और समुदाय अपनी सामूहिक यादों को जीवित रखते हैं। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ सरकार हमारे आदिवासी कलाकारों को समर्थन और मान्यता देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। मैं आप सभी की सफलता की कामना करता हूं और आशा करता हूं कि यह त्योहार विविधता की भावना का उत्सव मनाता है जो भारत के विचार के मूल में है।

इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री नहीं होता, तब भी इस आयोजन में शामिल होने आता। झारखंड के सीएम ने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को बधाई दी। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के जरिए वंचित वर्ग को आगे लाने का प्रयास किया गया, यह प्रयास सराहनीय है। मैं भी एक आदिवासी समाज से आता हूँ। किस तरह मैं सीएम बना, यह एक बड़ी चुनौती थी। मैं सीएम नहीं होता, तो भी मैं इस कार्यक्रम को देखने आता। भूपेश बघेल जी के प्रयास से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव शुरू किया गया। यह पूरे देश में अपने आप में अलग आयोजन है। भूपेश बघेल जी को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देना चाहता हूँ। आज निश्चित रूप से इस कार्यक्रम के माध्यम से पूरे देश के लिए सन्देश है। अगर हम चाहें तो आदिवासी वर्ग कदम से कदम मिलाकर चल सकता है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एक मील का पत्थर साबित होगा। मैं भी एक आदिवासी वर्ग से आता हूँ और मुझे यहां तक पहुँचने में काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के जनजातीय समाज मे काफी समानताएं देखने मिलती हैँ। इस आयोजन से जनजातीय समाज को एक ताक़त और ऊर्जा मिलेगी। यहां सिर्फ एक नृत्य महोत्सव नही है, जबकि पूरा मेला लगाया गया है, इससे जनजातीय समूहों के भीतर छिपे गुणों को देश-विदेश तक भेजने का मौका मिला है। मैंने छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों और योजनाओं का अध्ययन किया है। कैसे हम छत्तीसगढ़ में आदिवासी उत्थान के लिए चलाई जा रही, योजनाओं को अपने राज्य में लागू करें, इस पर काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में एमएसपी पर लघुवनोपज की खरीदी की जा रही है, यह सरहानीय है।

इस मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, देश-विदेश से आए कलाकारों का छत्तीसगढ़ की धरा पर स्वागत है। 2019 के आदिवासी नृत्य महोत्सव जबरदस्त सफलता मिली। सफलता को देखते हुए हर साल इस आयोजन का निर्णय लिया गया था। पिछले साल कोरोना के कारण आयोजन नहीं हुआ। इस साल कोरोना के मामलों में कमी आई, तो राज्योत्सव के इस साथ इस आयोजन को जोड़कर हमने पांच दिनों के कार्यक्रम करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, आदिवसियों की सँस्कृति सबसे पुरानी सँस्कृति है। छत्तीसगढ़ में एक तिहाई आबादी आदिवासियों की है। हमने आदिवसियों की सँस्कृति को पहचान दिलाने काम किया। एक मंच पर देश-विदेश की आदिवासी कला सँस्कृति नृत्य देखने को मिलेगा। सँस्कृति का आदान-प्रदान होगा। राज्य सरकार के 52 लघुवनोपज की खरीदी से आदिवसियों की आय में बढ़ोत्तरी हुई। उद्योगों द्वारा आदिवासियों की ली गई जमीन हमने वापस कराई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने राज्य भर में गौठान बनाये गए। गांव में रोजगार के अवसर बढ़े इसके लिए गौठानों में इंडस्ट्रीयल पार्क विकसित किये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विश्व पटल पर लाने पहचान दिलाने का काम हमारी सरकार ने किया है। इस मौके पर छत्तीसगढ़ के कई मंत्री, विधायक, सांसद और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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