- कलेक्टर के निर्देश अनुविभागीय अधिकारी कर रहे है अवैध क्लीनिकों पर कार्यवाही, प्रशिक्षित चिकित्सकों से ही कराएं इलाज
आफ़ताब आलम/बलरामपुर : जिले में चिकित्सा सुविधाओं में निरंतर विस्तार करते हुए प्रशासन दूरस्थ इलाकों के साथ-साथ पंडो व पहाड़ी कोरवा बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की तत्काल उपलब्धता के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है। जिला चिकित्सालय के अतिरिक्त सामुदायिक, प्राथमिक तथा उपस्वास्थ्य केन्द्र के माध्यम से प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मीयों द्वारा समुचित जांच उपरांत निःशुल्क दवाईयां वितरित की जा रही है। कलेक्टर श्री कुंदन कुमार ने स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने में कोई भी लापरवाही न करने तथा अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों, मेडिकल स्टोर्स एवं तथाकथित चिकित्सकों पर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। अप्रशिक्षित तथा बिना डिग्री धारी चिकित्सकों द्वारा अवैध क्लीनिक के माध्यम से मनमाने ढंग से पैसे लेकर गलत उपचार किया जाता है, फलस्वरूप सही उपचार न मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है। कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन ऐसे अवैध गतिविधियों के विरूद्ध लगातार कार्यवाही कर रही है। इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रामानुजगंज ने अवैध रूप से संचालित दो क्लीनिको को सील कर दिया है। अवैध क्लीनिक संचालन की सूचना मिलने पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रामानुजगंज श्री गौतम सिंह की अगुवाई में टीम ने क्लीनिक की जांच की। क्लीनिक की जांच में पाया गया कि विजयनगर में रजा मेडिकल के पास इमामुद्दीन अंसारी के द्वारा अवैध रूप से लोगों का इलाज किया जा रहा था और इमामुद्दीन के पास चिकित्सका सुविधा प्रदान करने से संबंधित कोई वैध डिग्री या पत्रोपाधि नहीं है। जांच उपरांत एसडीएम द्वारा क्लिनिक को सील कर दिया। इसके पश्चात् विजयनगर में ही मो0 अली के द्वारा भी अवैध क्लीनिक संचालित कर लोगों के इलाज की सूचना मिलने पर तत्काल प्रशासन की टीम द्वारा उसे सील कर दिया गया। कलेक्टर श्री कुंदन कुमार के निर्देश पर अवैध चिकित्सकीय गतिविधियों तथा क्लीनिकों पर कार्यवाही कर रही है तथा सुदूर इलाकों तक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करते हुए लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है।
जिला चिकित्सालय में लोगों को मिल रही है कीमोथेरेपी की सुविधा, डॉ सुबोध सिंह के नेतृत्व में मरीजों को दी जा रही है कीमोथेरेपी
भ्रांतियों के चलते उपचार लेने में न हिचकिचाएं, लक्षण की पहचान के लिए कराएं जांच-डॉ.सुबोध सिंह
बलरामपुर : जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार विस्तार होने के क्रम में एक और महत्वपूर्ण पहल हुई है। शासन के मंशानुरूप जिला चिकित्सालय में अब कैंसर से ग्रसित मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा मिल रही है। कीमोथेरेपी के लिए पहले मरीजों को जिले से बाहर बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था, किन्तु अब जिला चिकित्सालय के ओपीडी कक्ष क्रमांक 52 में डॉक्टर सुबोध सिंह के द्वारा के कीमोथेरेपी की सुविधा दी जा रही है और अब तक चार मरीज सफलतापूर्वक कीमोथैरेपी से लाभान्वित हुए हैं। डॉक्टर सुबोध सिंह ने बताया कि कैंसर ऐसी बीमारी है जिसका समय पर पता चल जाये तो उसकी गंभीरता को कम किया जा सकता है और बीमारी से लोगों की जान बचाई जा सकती है। भ्रांतियों के चलते लोग उपचार लेने में हिचकिचाते हैं तथा लक्षण के पहचान ना होने की स्थिति में समस्या गंभीर होकर भयावह और जानलेवा कैंसर का रूप ले सकती है। डॉक्टर सुबोध सिंह ने इस प्रकार की भ्रांतियों को दूर करने के लिए सलाह दी है कि किसी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल आकर जांच कराएं। जिला चिकित्सालय में 4 अक्टूबर को इसके लिए विशेष कैंप का आयोजन किया गया था, जिसमें 13 लोग लाभान्वित हुए हैं। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों की टीम को बधाई दी और बेहतर से बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए उनका उत्साहवर्धन किया। छत्तीसगढ़ के सुदूर उत्तरपूर्व के अंतिम छोर के जिले में भी अब कैंसर के मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा मिलने से लोग लाभान्वित होंगे।
मच्छरों के हैबिट व डेंसिटी का पता लगाने जिले में हुआ एंटोमोलोजिकल सर्वे, विशेषज्ञों की टीम ने जिले के विभिन्न स्थानों से लिए मच्छरों के सैंपल
जिले को 2027 तक मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य, डॉक्टरों की अपील सोते समय अनिवार्य रूप से करें मच्छरदानी का उपयोग
बलरामपुर : बलरामपुर-रामानुजगंज जिला पूर्व में सार्वधिक मलेरिया केस के लिए जाना जाता था, जहां वर्ष 2017 में जिले में कुल 11 हजार 8 मलेरिया के रोगी थे, वहीं वर्ष 2020 में कुल 444 मलेरिया के रोगी पाए गए थे। जिले में मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया सहित अन्य दूसरी वेक्टर जनित बीमारी के अध्ययन हेतु राज्य की टीम एंटोमोलोजिकल सर्वे करने आये थे। रायपुर से आई विशेषज्ञों की टीम बलरामपुर के ग्रामीण इलाको से मच्छरों का सैंपल रायपुर लेकर गयी है, जहां एन.आई.एम.आर. रायपुर में इनकी जांच की जायेगी। जिले में इस वर्ष जनवरी से सितम्बर तक जहां कुल 152 मलेरिया के रोगी है, वहीं अब तक एलाइजा जांच में एक भी डेंगू के रोगी की पुष्टि नहीं हुई है। एंटोमोलोजिकल टीम में स्टेट एंटोमोलेजिस्ट डॉ. सुबोध धर शर्मा, एंटोमोलोजिस्ट विनिता दुबे, किट संग्रहक तेज राम मण्डावी के अलावा जिला सलाहकार दिव्य किशोर व मुकेश शामिल थे। टीम द्वारा विकासखण्ड बलरामपुर के बड़कीमहरी, सारंगपुर, बलरामपुर के कई गांवों से मच्छरों का सैंपल लिया तथा जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर आने की संभावना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.बसंत सिंह ने बताया कि जिले में मलेरिया व डेंगू के केस में अभी तक वांछित सफलता मिली है तथा वर्ष 2027 तक मलेरिया एलीमिनेशन का लक्ष्य रखा गया है। इसी कारण मच्छरों के हैबिट जानने के लिए जिले में एंटोमोलोजिकल सर्वे कराया गया ताकि मच्छरों की डेंसिटी पता लगाया जा सके, सर्वे के लिए हमने राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा था। अभी वर्तमान में जिले में मलेरिया के केस कम मिले है, डेंगू के रैपिड टेस्ट जांच में केस मिले थे, जिसका सैंपल एलाइजा जांच हेतु रायगढ़ व अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था, जहां सभी डेंगू के सैंपल नेगेटिव पाए गए। वर्तमान में जिले में एक भी डेंगू के कन्फर्म केस नहीं है किन्तु फिर भी लोगों को बीमारियों के प्रति सावधानी बरतना चाहिए। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुबोध ने कहा कि जिले में इस तरह का सर्वे पहली बार हुआ है, जिसके लिए हम टीम के आभारी हैं। अभी जिले में मलेरिया के केस कम है हमारी अपील है कि लोग रात को मच्छरदानी लगाकर सोएं ताकि हम अपने जिले को मलेरिया मुक्त बना सके।

