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बेेट‍ियों का बोलबाला: सेना के बाद अब मिल‍िट्री स्कूल में भी दाख‍िले को हरी झंडी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये न‍िर्देश

नई द‍िल्ली : आर्मी में एनडीए के जर‍िये लड़कियों के प्रवेश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मिलिट्री स्कूल एग्जामिनेशन में भी उन्हें बैठने की इजाजत दे दी है. अब वो 2022 सेशन में दाखिला ले सकेंगी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेजों में दाखिले के लिए 18 दिसंबर को होने वाले एग्जाम में महिला कैंडिडेट को बैठने की इजाजत दी जाए जिससे उनका नये सेशन 2022 में एडमिशन हो सके. आइए जानें सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए क्या निर्देश दिए हैं…

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि अब छात्राओं को नये सेशन से राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज (आरआईएमसी) और राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों (आरएमएस) में प्रवेश मिलेगा. यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित किया गया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे के अनुसार, अन्य संबंधित बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सहायता के साथ अतिरिक्त रिक्तियों को अधिकृत करने की आवश्यकता है. इसे दो चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव है.

पहले चरण में RIMC में प्रवेश के लिए छह माह के लिए पांच लड़कियों को शामिल करके स्टूडेंट्स की अधिकतम क्षमता 250 से बढ़ाकर 300 की जाएगी. यह वृद्धि कुछ बुनियादी ढांचे में संशोधन और गर्ल कैडेटों का समर्थन करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों से प्रभावित हो सकती है. लड़कियों को RIMC में प्रवेश के लिए जून 2022 में होने वाली RIMC प्रवेश परीक्षा में शामिल करने की अनुमति दी जाएगी, जो जनवरी 2023 से शुरू होने वाले टर्म के लिए होगी.

इसी तरह फेज-2 में हर छह महीने में 10 लड़कियों को शामिल करने की क्षमता 300 से बढ़ाकर 350 की जाएगी. इस विस्तार के अंत में आरआईएमसी में 250 लड़के और 100 लड़कियां होंगी. इसके लिए, यह प्रस्तुत किया जाता है कि लड़कियों को RIMC में प्रवेश के लिए जून 2027 में निर्धारित RIMC प्रवेश परीक्षा में जनवरी 2028 से शुरू होने वाले टर्म के लिए अनुमति दी जाएगी. बता दें कि RIMC देहरादून (उत्तराखंड) में स्थित है.

सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे में निजता, सुरक्षा और सुरक्षा मामले में लड़कियों के जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए स्कूल परिसर में लड़कियों के अनुकूल बुनियादी ढांचा बनाने की आवश्यकता की ओर इशारा किया गया है. अधिकारियों का एक बोर्ड इससे जुड़े सभी मुद्दों की जांच कर रहा है ताकि छात्राओं के अनुकूल बुनियादी ढांचा और सहायक स्टाफ स्थापित किया जा सके.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों में लड़कियों के लिए प्रवेश में प्रत्येक स्कूल में प्रथम चरण में कुल रिक्तियों का 10% का कोटा शामिल होगा, जो आरएमएस में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में लागू विभिन्न आरक्षणों के अनुसार कक्षा-छठी में प्रवेश के लिए प्रभावी होगा. रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि आरएमएस में लागू विभिन्न आरक्षणों के अनुसार कक्षा- VI और कक्षा- IX में प्रवेश के लिए प्रत्येक स्कूल में कुल रिक्तियों का 10% आरक्षित करें.

राष्ट्रीय सैन्य स्कूल चैल (हिमाचल प्रदेश), अजमेर (राजस्थान), बेलगाम (कर्नाटक), बेंगलुरु (कर्नाटक) और धौलपुर (राजस्थान) में स्थित हैं. उपलब्ध सीटों में से 30% सिविलियंस के बच्चों के लिए भी निर्धारित हैं. 350 सीटों के लिए प्रवेश परीक्षा दिसंबर के आसपास आयोजित की जाती है. इसी तरह फेज-2 में हर छह महीने में 10 लड़कियों को शामिल करने की क्षमता 300 से बढ़ाकर 350 की जाएगी. इस विस्तार के अंत में आरआईएमसी में 250 लड़के और 100 लड़कियां होंगी.

अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि अब इस मामले में देरी नहीं की जा सकती है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एश्वर्य भाटी ने जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच में कहा कि इस बार रिम्स के लिए 18 दिसंबर को एग्जाम है और तैयारियां एडवांस स्टेज पर हैं. कोर्ट इस बार महिलाओं के प्रवेश को छोड़ दे बल्कि 2023 के सेशन के लिए इजाजत दे तो बेहतर होगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया और कहा कि लड़कियों को जून 2022 सेशन में प्रवेश में शामिल होने के लिए छह महीना बहुत ज्यादा है.

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