बिलासपुर: सड़कों की बदहाली को लेकर चल रही जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने आमजनों की पीड़ा व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को सड़कों के गड्ढों को भरने का फरमान जारी किया, ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न हो। दरअसल न्यायमित्र ने सुनवाई के दौरान दो दिन पहले नईदुनिया में प्रकाशित उस खबर का जिक्र किया, जिसमें अशोक नगर की युवती अल्पना शर्मा गड्ढे में गिरकर घायल हो गई थी और हाथ की हड्डी टूट गई।
हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा व जस्टिस रजनी दुबे के कोर्ट में अधिवक्ता हिमांक सलूजा की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इसके साथ ही राज्यभर की सड़कों की दुर्दशा को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान में लेकर जनहित याचिका पर भी सुनवाई की।अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने कोर्ट को बताया कि शहर की हालत इतनी बदतर है कि जगह-जगह गड्ढे हैं।
इसके कारण लगातार हादसे भी हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव, राघवेंद्र प्रधान ने शहर की सड़कों के निरीक्षण के बाद अपना प्रारंभिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत किया है। जिसमें शहर के साथ ही प्रदेश भर में खस्ताहाल सड़कों का उल्लेख किया गया है। इस दौरान राज्य शासन व नगर निगम की तरफ से बताया गया कि सड़कों का निर्माण व मरम्मत का काम चल रहा है।
इसमें कोर्ट ने सड़कों के निर्माण से लेकर कार्य पूर्णता के संबंध में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। अशोक नगर निवासी अल्पना शर्मा की दुर्घटना पर कोर्ट ने आमजनता की हालत पर पीड़ा व्यक्त की। साथ ही राज्य शासन व नगर निगम को तत्काल सभी गड्ढों को भरने के आदेश दिए। ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटना से जनता को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
हिमांक सलूजा की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने न्यायमित्रों की प्रारंभिक रिपोर्ट पर राज्य सरकार और नगर निगम बिलासपुर को 28 अक्टूबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को है। दरअसल, न्यायमित्रों ने प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया है। जिस पर कोर्ट ने सड़कों के निर्माण व मरम्मत करने की जानकारी दी है। इस पर कोर्ट ने राज्य शासन व नगर निगम को न्यायमित्रों के साथ मिलकर संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर भी सुनवाई की। इस दौरान न्यायमित्र राजीव श्रीवास्तव, प्रतीक शर्मा व राघवेंद्र प्रधान की तरफ से प्रदेश भर के खस्ताहाल सड़कों की जानकारी दी गई। साथ ही बताया प्रकरण में राज्य शासन के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग व छत्तीसगढ़ विुत वितरण कंपनी के साथ ही अन्य पक्षकारों की सूची पेश की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस प्रकरण में भी राजीव श्रीवास्तव, प्रतीक शर्मा एवं राघवेंद्र प्रधान को न्यायमित्र नियुक्त करने के साथ ही सालसा की ओर से आशुतोष सिंह कछुवाहा को नियुक्त किया। इस दौरान कोर्ट ने नेशनल हाइवे एवं छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को नोटिस जारी किया कर जवाब मांगा है।
न्यायमित्र प्रतीक शर्मा ने छत्तीसगढ़ राज्य की खराब सड़कों की लिस्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की। जिसे रिकार्ड में लेते हुए युगलपीठ ने राज्य सरकार और नेशनल हाइवे अथारिटी को स्टेटस रिपोर्ट फ़ोटो सहित प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेशित किया कि जिस रोड में कार्य चल रहा हो उस रोड में कार्य प्रारंभ होने की तारीख एवं कार्य पूर्ण होने की तारीख तथा जिस रोड का टेंडर ही जारी न हुआ हो उसकी भी जानकारी विशेष रूप से प्रस्तुत की जाए। स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका की सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।

