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हाथरस गैंगरेप: घुटन और सामाजिक बहिष्कार झेल रहा पीड़ित परिवार, इंसाफ की आस में लिए बैठा है बेटी की अस्थियां

हाथरस : उत्तर प्रदेश में हाथरस के सामूहिक बलात्कार कांड को एक बरस पूरा हो रहा है, लेकिन दुष्कर्म एवं हत्या की शिकार दलित लड़की की अस्थियां अब भी विसर्जित नहीं की गई हैं. ये अस्थियां उसके परिजनों ने एक छोटे से कलश में घर के कमरे के एक कोने में रखी हुई हैं. अस्थियां ही नहीं, उसकी सिलाई मशीन और कपड़े भी संभाल कर रखे हैं. ऐसा क्यों है? इस सवाल के जवाब में दलित परिवार कहता है- जब तक उसे अदालत से न्याय नहीं मिल जाता, वह अपनी बच्ची का ‘अंतिम संस्कार’ नहीं करेंगे. परिवार के लोगों ने कहा- यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय के खिलाफ है.

एक साल पहले 14 सितंबर, 2020 को 19 वर्षीय लड़की के साथ कथित तौर पर ऊंची जाति के चार युवकों ने गैंगरेप किया और उसे खेत में खून से लथपथ छोड़कर भाग गए. उसकी गर्दन और प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर चोटें पाई गई थीं. अलीगढ़ के एक अस्पताल के बाद पीड़िता को दिल्ली ले जाया गया था. 11 दिन बाद, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था. देर शाम एम्बुलेंस में शव को उसके गांव ले जाया गया था और यूपी पुलिस और प्रशासन ने सुबह 3.30 बजे जबरन शव का अंतिम संस्कार कर दिया.

एक साल बाद घुटन का आलम
इस पूरी घटना को पूरा साल बीत जाने के बाद भी परिवार को गांव से काट दिया गया है. सीसीटीवी कैमरे हर समय उनके घर पर नज़र रखते हैं. सीआरपीएफ के करीब 35 जवान पहरा देते रहते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के बड़े भाई ने कहा, “यहां घुटन होती है. कोई हमसे बात नहीं करता…, हमारे साथ गुनाहगारों जैसा बर्ताव होता है… मुझे पता है कि सीआरपीएफ के जाते ही वो (दबंग) हम पर हमला करेंगे. मेरी तीन छोटी बेटियां हैं और मैं उनकी सुरक्षा को लेकर परेशान हूं.”

‘हम चाहते हैं लोग हमें स्वीकार करें’
लड़की के बेरोज़गार पिता ने कहा कि गांव में उनका घर 70-80 साल पुराना है और उसे छोड़कर जाना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा, “इस जगह को छोड़ना आसान नहीं है. हम चाहते हैं कि लोग हमें स्वीकार करें. हमने क्या गलत किया है? हम न तो मंदिर जा सकते हैं और न ही बाज़ार. हमें घर पर ही कैद रहना होता है. प्रार्थना करते हैं कि अदालत फैसला जल्द दे.” पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी लड़ाई अब न केवल अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए है, बल्कि गांव में सामाजिक अन्याय के खिलाफ भी है.

लड़की के भाई ने घटना के बाद गांव में अपने परिवार के प्रति ग्रामीणों के बदले व्यवहार के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, ‘मैंने आरोपियों के परिवारों को कारों में जाते देखा है. उनके साथ ऑटो-रिक्शा और जीप में अन्य ग्रामीणों का काफिला चलता है. जब वे अदालत जाते हैं या जेल में आरोपियों से मिलने जाते हैं, तो आधा गांव उनके साथ होता है, लेकिन हमारे साथ कोई नहीं.’

किस तरह चल रही है जांच?
लड़की की मौत के बाद दो मामले दर्ज किए गए थे. उनकी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट और हाथरस में एससी/एसटी अदालत कर रही है. उच्च न्यायालय में, विशेष जांच दल ने अभी तक जबरन दाह संस्कार पर एक भी रिपोर्ट पेश नहीं की है. एससी/एसटी कोर्ट रेप-हत्या मामले की सुनवाई कर रही है. दबंग जाति के चार लोगों- संदीप (20), रवि (35), लव कुश (23), और रामू (26) को इस मामले में आरोपी बनाया गया है. दूसरी तरफ, परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा मिला, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के वादे के बावजूद उन्हें अभी तक नौकरी और नया घर नहीं मिला है.

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