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मानसिक विकार से ग्रसित व्यक्ति झाड़-फूंक के चक्कर में न फंसे: डॉ. रुख़सार खान

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  • बकावंड में मानसिक स्वास्थ्य शिविर में 60 मरीजों की हुई निःशुल्क जांच

जगदलपुर । जिले में मानसिक रोगियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के द्वारा लगातार शिविर आयोजित किये जा रहे है। इसके तहत अगस्त माह में ओल्ड एज होम, बाल सम्प्रेक्षण गृह, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहंडीगुड़ा और दरभा में शिविर का आयोजन किया जा चुका है। शिविर के माध्यम से लोगों को होने वाली मानसिक समस्याओं से सम्बंधित जानकारी दी जा रही , साथ ही साथ मानसिक रोगियों की पहचान कर उनका निःशुल्क इलाज भी किया जा रहा है। बुधवार को बकावंड में मानसिक रोगियों के लिये जांच व चिकित्सा शिविर आयोजन किया गया । जिसमें सामान्य एवं गंभीर मानसिक रोग से पीडि़त 60 मरीजों का इलाज कर उन्हें नि:शुल्क दवाई का वितरण किया गया।

डीएमएचपी मेडिकल ऑफिसर रुखसार खान ने बताया, “शिविर आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में यह जागरूकता लाना है कि मानसिक रोग भी अन्य रोगों के ही समान है। मानसिक विकार से ग्रसित व्यक्ति को झाड़-फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाकर इलाज कराना चाहिए। क्योंकि इलाज कराने से ही मानसिक बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। उन्होंने बताया, जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के द्वारा आयोजित शिविर में कुल 60 मरीजों की जांच की गई जिसमें सिजोफ्रेनिया के 14 मरीज, एक्यूट साइकोसिस के 12, डिप्रेशन के 6 मरीज, अल्कोहल डिपेंडेंस सिंड्रोम के 5, सीज़र डिसऑर्डर के 4, मेन्टल रिटार्डेशन के 1 व सोमाटाइजेसन के 6 मरीज मिले। इन मरीजों की प्रारंभिक जांच कर दवा दी गयी।

जिला मानसिक स्वास्थ्य के नोडल ऑफिसर डॉ.ऋषभ साव ने बताया, “तनाव की स्थिति में रहने या लगातार शराब समेत अन्य नशीली पदार्थ का सेवन करने से इसका सीधा असर मानव मस्तिष्क पर पड़ता है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति मानसिक रोग से पीडि़त हो सकता है। उन्होंने शिविर में मानसिक रोग के लक्षण और उससे बचाव के बारे में जानकारी दी। शिविर में गंभीर मानसिक रोग से पीडि़त मरीजों के हाव-भाव, दैनिक गतिविधियों, पारिवारिक वातावरण समेत अन्य गतिविधियों की जानकारी लेने के बाद उनका इलाज किया गया। उन्होंने बताया , मानसिक रोग से ग्रसित बहुत से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे। मानसिक रोगों का इलाज किया जा सकता है। जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी हालत को मानसिक रोग कहते हैं। मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं पाता और उसे रोजमर्रा के काम ठीक से करने में मुश्किल होती है। मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके हालात कैसे हैं और उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। कुछ लोगों में इसके लक्षण लंबे समय तक रहते हैं और साफ नजर आते हैं, जबकि कुछ लोगों में शायद थोड़े समय के लिए हों और साफ नजर न आएं। मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है। मानसिक रोगों का सही समय पर उपचार करवाना बेहद जरूरी है, वरना भविष्य में इसके शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं।

मानसिक तनाव के लक्षण

तनाव, उलझन या घबराहट रहना, जीवन के प्रति निराश रहना, कानों में बिना कारण किसी की आवाज सुनाई देना, शक करना अथवा डर लगना, एक ही बात बार-बार सोंचते रहना, किसी भूत-प्रेत, देवी-देवता आदि की छाया का भ्रम होना, बिना कारण गाली गलौज करना, व्यवहार में तेजी आना, क्षमता से अधिक बड़ी बड़ी बातें करना, बुढ़ापे मे याददाश्त की कमी हो जाना, लगातार सिर दर्द बने रहना, मिर्गी बेहोशी या अन्य किसी प्रकार के दौरे आना, किसी प्रकार का नशा करना।

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