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सरपंच भरतदास मानिकपुरी ने की नहरों में पानी की मांग

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  • नहरों में पानी नही, धान की रोपाई प्रभावित
  • नहरों में पानी नही आने से किसान परेशान, सुख रही फसल
पुरुषोत्तम कैवर्त/कसडोल। कसडोल सहित अंचल के किसानों की लाइफ लाइन कही जाने वाली बलार नहर परियोजना मौजूदा समय में बदहाली के दौर में है। नहरो के साथ छोटी नालियां मिट्टी, बालू और घास फूस से पटी पड़ी हैं। परिणामस्वरूप नहरों में पानी नहीं आने से धान की रोपाई को लेकर संकट पैदा हो गया है। खेतो में पानी की कमी को लेकर किसान परेशान हैं। खेतों में तैयार धान की फसले भी सूखने अथवा खराब होने लगी है। दरअसल जून जुलाई के शुरूआती दिनों में तो अच्छी बारिश हो गई थी, साथ ही समय से पूर्व आए मानसून में भी जमकर मेघ बरसे। फिर इसके बाद से मौसम लगातार किसानों से आंख मिचौली कर रहा है, जो मौजूदा समय तक जारी है। ऐसे में अब बारिश नहीं होने से इस सीजन की प्रमुख फसल धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। अधिकतर किसान मानसून का इंतजार कर रहें है। मानसून की बारिश नहीं होने पर किसानों को नहरों पर भरोसा होता है, लेकिन इस समय पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं आने से किसान परेशान हो गए हैं। उक्त समस्या को देखते हुए अंचल के किसान नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर मुख्यालय स्थित अनुविभागीय अधिकारी बलार नहर जल संसाधन कसडोल कार्यालय पहुंच कर जल्द ही नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की हैं। किसानों ने विभागीय अधिकारी को अवगत कराया कि पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों की धान की रोपाई अधर में लटकी है। स्थिति यह है कि किसानों की तैयार धान की पौधे खराब होने लगे है। किसानों का कहना है कि नहरों में पानी नहीं होने के कारण धान की बुआई व रोपाई नहीं हो पा रही है। पानी की मांग को लेकर प्रमुखरूप से भरत दास मानिकपुरी सरपंच छरछेद, खिकराम वर्मा किसान, यशवंत वर्मा किसान, नीरेंद्र साहू किसान, राकेश रजक, ओम प्रकाश कैवर्त, चंदराम साहू, सभाराम घृतलागरे किसान, राजेश कोशले, यादराम पाटले, लीलाराम साहू सहित किसान उपस्थित रहे।
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