Sunday, January 18, 2026
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सरकार के पास नहीं है किसानों के कर्ज माफ़ी का कोई प्रस्‍ताव, केंद्र ने दी ये बड़ी जानकारी

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नई दिल्ली: सरकार ने कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों सहित किसानों का कर्ज माफ करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड ने कहा कि केंद्र ने ‘कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना (ADWDRS), 2008’ के बाद से कोई भी कृषि ऋण माफी योजना लागू नहीं की है  केंद्र सरकार की तरफ से यह बात स्‍पष्‍ट कर दी गई है कि किसानों की कर्ज माफी से जुड़ा कोई भी प्रस्‍ताव न तो उसके पास आया है और न ही विचाराधीन है. केंद्र सरकार की तरफ से लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब के तौर पर यह जानकारी दी गई है. सरकार की तरफ से यह भी बताया गया है कि उसने किसानों की सहायता के लिए कौन-कौन सी योजनाएं शुरू की हैं.

कोई कृषि ऋण माफी योजना नहीं
सरकार ने कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों सहित किसानों का कर्ज माफ करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड ने कहा कि केंद्र ने ‘कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना (ADWDRS), 2008’ के बाद से कोई भी कृषि ऋण माफी योजना लागू नहीं की है. उन्‍होंने ने बताया, ‘देश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों सहित किसानों का कर्ज माफ करने का भारत सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.’

किसानों को मिल रही क्‍या मदद
कराड ने किसानों के कर्ज के बोझ को कम करने और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों सहित कृषि में लगे लोगों के कल्याण के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई प्रमुख पहलों को भी सूचीबद्ध किया. कराड ने बताया कि 3 लाख रुपए तक के अल्पकालिक फसल ऋण के लिए ब्याज सबवेंशन, आरबीआई के संपार्श्विक-मुक्त कृषि ऋण की सीमा को 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1 रुपए करने जैसी योजनाओं का हवाला दिया. इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपए की प्रत्यक्ष आय सहायता भी दी जा रही है.

संसद में गूंजा किसानों की आत्‍महत्‍या का मामला
सरकार की तरफ से यह जवाब तब दिया गया है जब पिछले दिनों लोकसभा में किसानों की आत्‍महत्‍या का मामला गूंजा था. लोकसभा में सरकार से पूछा गया था कि क्या सरकार बताएगी कि पिछले तीन साल में अलग-अलग राज्यों में कितने किसानों ने आत्महत्या की है? यह भी पूछा गया कि क्या सरकार किसानों की आत्महत्या की घटनाओं का कोई ब्योरा रखती है? इन सवालों के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, गृह मंत्रालय के अधीन आने वाला राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) अपनी रिपोर्ट एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया में आत्महत्याओं पर सूचनाओं को जुटाता और प्रसार करता है.

क्‍यों आत्‍महत्‍या कर रहे किसान
केंद्रीय मंत्री ने कहा, एनसीआरबी ने 2019 तक की रिपोर्ट प्रकाशित की है जो इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है. एनसीआरबी रिपोर्ट में 2017 से 2019 की घटनाओं का जिक्र है. इस रिपोर्ट में संख्या बताई गई है लेकिन किसानों की आत्महत्या के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है. व्यक्तियों (किसानों सहित) द्वारा आत्महत्या के कारणों में पारिवारिक समस्याएं, बीमारी, नशाखोरी या व्यसन, विवाह संबंधी मुद्दे, प्रेम संबंध, दिवालियापन या ऋणग्रस्तता, परीक्षा में विफलता, बेरोजगारी, पेशेवर या करियर समस्या और संपत्ति विवाद शामिल है.

कर्ज माफी पर क्‍या बोले थे कृषि मंत्री
सरकार से यह भी पूछा गया था कि किसानों को परेशानी से उबारने के लिए सरकार कोई योजना तैयार करने पर विचार कर रही है जो किसान अपना ऋण चुका पाने में असमर्थ हैं? इसके जवाब में कृषि मंत्री ने कहा था कि केंद्रीय बजट 2008-09 में घोषित कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना के तहत विभिन्न राज्यों के 3.73 करोड़ किसानों ने 52,259.86 करोड़ रुपये की राशि का लाभ प्राप्त किया है. चूंकि सभी किसान संस्थागत ऋण के दायरे में नहीं आते, इसलिए कुछ ही किसान ऋण माफी योजना से लाभान्वित हुए हैं.

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