- बाल श्रम को पनाह देने में लगा हुआ पंचायत के कर्मचारी
रवि सेन/बागबाहरा : शासन द्वारा लोगो को रोजगार देने सहित विकास कार्यो के लिये महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा ) भारत में लागू किया । इस योजना अंतर्गत ग्रामीणों को 100 दिवस का रोजगार दिया जाता है जिसमे 18 वर्ष बाद वयस्क होने के उपरांत मनरेगा योजना के कार्यो में भाग ले सकते है लेकिन बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत लमकेनी में पदस्त सचिव द्वारा ग्राम तिलाईदादर के एक नाबालिक लड़की को ग्राम में होने वाले मखियारीन तालाब गहरीकरण एवं मत्स्य पालन के लिए भोजराम के निजी डबरी में मनरेगा कार्य मे 37 दिन तक काम करवा कर उनकी मजदूरी का 5890 रुपये का भुकतान भी कर दिया है । ग्रामीणों ने सचिव की शिकायत करते हुए कहा कि सचिव अपनी मर्जी से लोगो का नाम भरकर रोजगार गारंटी में पैसे निकलता है वही फर्जी मस्टररोल भरकर अपनी जेब गरम करने में लगा रहता है । गौरतलब हो कि ग्राम पंचायत लमकेनी में रोजगार सहायक नही होने की वजह से ग्राम पंचायत सचिव ही मनरेगा के पूरे कार्यो की देखरेख करता है और अपनी मनमानी चलाता है ।
बाल श्रम को पनाह दे रहे पंचायत सचिव – एक ओर प्रशासन बाल श्रम को रोकने विभिन्न उपाय सहित कड़े कानून ला रही है ताकि बाल श्रम को रोका जा सके वही सरकार के इस नुमाइंदे ग्राम पंचायत तिलाईदादर सचिव द्वारा बाल को बढ़ावा देने ग्राम के ही नाबालिक बालिका से 37 दिन मनरेगा में काम करवाया गया है । भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के अनुसार, किसी भी प्रकार का बलात् श्रम निषिद्ध है वहीअनुच्छेद 24 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के बच्चे को कोई खतरनाक काम करने के लिये नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
यह होनी चाहिए पंचायत की भूमिका – भारत में लगभग 80% बाल श्रम ग्रामीण क्षेत्रों में होता है। पंचायत बाल श्रम को कम करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकती है। इस संदर्भ में पंचायत को चाहिये की बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करना। माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिये प्रोत्साहित करें , ऐसा माहौल बनाएॅं जहाॅं बच्चों को काम ना करना पड़े और वे इसके बजाय स्कूलों में दाखिला लें , सुनिश्चित करें कि बच्चों को स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएॅं उपलब्ध हैं। बाल श्रम को प्रतिबंधित करने वाले कानूनों और इन कानूनों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के बारे में उद्योग के मालिकों को सूचित करें।
भूपेंद्र साहू (सचिव ग्राम पंचायत लमकेनी) – इस पूरे मामले की जानकारी पूछने के लिए दूरभाष के माध्यम से संपर्क साधने की कोशिश किया गया पर सचिव का मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर बताया ।
अनुजा कावड़े (टी.ए. मनरेगा) – पंचायत प्रस्ताव एवं सरपंच – सचिव की सहमति से जॉब कार्ड बनाया जाता है अगर हितग्राही का गलत डॉक्यूमेंट लगा है तो ये पंचायत की जिम्मेदारी है ।
खूबचंद वर्मा (पी.ओ. मनरेगा शाखा बागबाहरा) – अब तक इस प्रकार की शिकायत नही आई है सरपंच सचिव द्वारा प्रस्ताव बनाकर जॉब कार्ड बनवाया जाता है । अगर नाबालिक का जॉब कार्ड बना है तो यह गलत है , जॉब कार्ड को निरस्त किया जाएगा ।

