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छत्तीसगढ़ की पहली पर्वतरोहनी नैना सिंह धाकड़ का फरसगांव में युवाओं ने किया भव्य स्वागत 

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  • पर्वतारोहण करने के लिए शारीरिक के साथ साथ मानसिक रूप से भी फिट होना आवश्यक- नैना 
प्रकाश नाग/केशकाल : अक्सर नक्सली वारदातों के लिए चर्चा में रहने वाले बस्तर को यहां की बेटी ने नई पहचान दी है। बस्तर की बेटी नैना सिंह धाकड़ ने विश्व के सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट और विश्व की चौथी ऊंची चोटी माउंट ल्होत्से पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया है। नैना सिंह धाकड़ छत्तीसगढ़ की पहली महिला बनी जो माउंट एवरेस्ट फतह की। नैना 75 दिनों के बाद आपने गृहग्राम बस्तर लौटी इस दौरान फरसगांव में उम्मीद एक सामाजिक संस्था के युवाओं द्वारा भव्य स्वागत किया ।
आपको बता दें कि पर्वतारोही नैना सिंह धाकड़ जगदलपुर जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर टाकरागुड़ा गांव की रहने वाली हैं, वे वर्ष 2010 से पर्वतारोहण से जुड़ी हैं जिसकी शुरुआत उन्होंने एनएसएस के जरिए किया था। उन्होंने बताया कि एक जून को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट की फतह करने के पहले 23 मई को 8 हजार 516 मीटर ऊंची माऊंट लोहत्से में भी उन्होंने सफलता पूर्वक चढ़ाई की। इन दोनों ही चोटियों की फतह करने वाली वे देश की दूसरी महिला पर्वतारोही हैं व छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद एवरेस्ट पर फतह करने वाली पहली महिला है। इससे पहले 1993 में भिलाई की सविता धपवाल ने बछेंद्री पाल के साथ एवरेस्ट पर पहुंची थी।
केशकाल विधानसभा क्षेत्र के फरसगांव रेस्टहाउस में युवाओ के द्वारा आतिशबाजी के साथ पुष्प माला भेटकर भव्य स्वागत किया गया साथ ही उम्मीद एक सामाजिक संस्था के युवाओं ने नैना सिंह धाकड़ को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस दौरान नैना ने बताया कि 10 वर्षो की मेहनत के बाद आज मेरा सपना पूरा हुआ है। मुझे इस मुक़ाम को हासिल करने में बस्तर कलेक्टर रजत बंसल, एनएमडीसी और मेरे परिवार से ने सबसे ज्यादा सहयोग किया है। नैना ने कहा कि बस्तर की बेटी हूँ और बस्तर में जन्म लिया है। कभी भी किसी को हार नहीं मानना है इसी सोच को लेकर मैंने कामयाबी हासिल की है।
एक समय था जब मेरे परिवार वालों ने मेरे फ्री घूमने पर पाबंदी लगा दिया था, जिसके लिए मैंने घरवालों से भी लड़ाई करना पड़ा तब जाकर मैंने आज यह मुकाम हासिल किया है। नैना ने कहा कि जिस तरह से मैंने 10 सालो से मेहतन करने के बाद ग्यारहवें साल में माउंट एवरेस्ट में फतेह हासिल किया है उसकी तरह सभी प्रदेश के सभी बेटों और बेटीयो को मेहनत करनी चाहिए साथ ही परिवार का भी सहयोग मिलना आवश्यक है। यदि हम मानसिक व शारीरिक से फिट हैं तो हमें जरूर कामयाबी मिलेगी।
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