प्रांतीय वॉच

माता के दर्शन के साथ पहाड़ों का रोमांचः चंदन से महकेगी मां बम्लेश्वरी की पहाड़ी, रूद्राक्ष के फल देख सकेंगे पर्यंटक व औशधीय पौधों की मिलेगी छांव, उद्घाटन के इंतजार में परिक्रमा पथ

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तिलकराम मंडावी/डोंगरगढ़ : मां बम्लेष्वरी उपर पहाड़ी में वन विचरण मार्ग (परिक्रमा पथ) का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। वन विभाग के माध्यम से यहां दिव्य वन प्रोजेक्ट के तहत दर्षनार्थियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए 3 करोड़ 15 लाख 97 हजार की लागत से पहाड़ की परिक्रमा करनें के लिए पर्यावरण प्रकृति भ्रमण पथ व सीढ़ीनुमा वन विचरण मार्ग का निर्माण कराया गया है। वन विभाग के अफसरों के मुताबिक परिक्रमा पथ में करीब 5 करोड़ रूपए खर्च होंगे। निर्माण पूर्ण होनें के बाद भी पथ उद्घाटन के इंतजार में है। औपचारिक लोकार्पण नहीं होनें के बाद भी दर्षनार्थियों ने परिक्रमा पथ का भ्रमण षुरू कर दिया है। एंट्री उपर मंदिर की ओर व एक्जिट रणचंडी मंदिर से दी गई है। बाहर से आनें वालें दर्षनार्थियों को देवी दर्षन के साथ ही पहाड़ व जंगल का रोमांच भी महसूस कर सकेंगे।चंदन से महकेगी पहाड़ी, रूद्राक्ष के फल भी देख सकेंगे पर्यंटक- परिक्रमा पथ में औशधीय पौधों को महत्व देते हुए 8 साल पहलें रोपण कराया गया था। पेड़ बननें के बाद चंदन की खुषबू से पहाड़ी महक उठेगी। साथ ही रूद्राक्ष के पौधें भी यहां पर लगाएं गए है। रूद्राक्ष के फल देखनें का एक अलग अनुभव पर्यंटकों को मिलेगा। पथ परिसर में पिकनिक स्पाॅट के रूप में बन चुका है। जहां पर चंदन, रूद्राक्ष, अंजीर, कोना कार्पस, रामफल, कुसुम-महुआ, कदम, बेल, चंपा, त्रिफला वन तैयार किया गया है। इसके अलावा पीपल, बरगद, आम, करंज, नीम, छातिम के पेड़ों की छांव भी मिलेगी। पहली बार भास्कर में परिक्रमा पथ की ड्रोन तस्वीर- परिक्रमा पथ निर्माण के बाद से लोकार्पण का इंतजार किया जा रहा है। दैनिक भास्कर आपकों सबसें पहलें ड्रोन कैमरे से परिक्रमा पथ का नजारा दिखा रहा है। हरियाली व प्राकृतिक छटाओं के बीच विचरण मार्ग में नालों के उपर लोहे की 7 पुलिया का निर्माण किया गया है। माता के दर्षनार्थियों को प्रकृति से जुड़नें का एक अवसर मिलेगा।

परिक्रमा पथ में छत्तीसगढ़ की 36 देवियों के होंगे दर्षन, 7 प्राकृतिक जल धारा के उपर ब्रिज बनानें बीएसपी ने दिए लोहे
मां बम्लेष्वरी उपर पहाड़ी में दर्षनार्थियों को प्रकृति से जोड़ने ंके लिए परिक्रमा पथ का निर्माण वन विभाग के माध्यम से पूर्ण हो चुका है। लेकिन फाॅरेस्ट के अफसरों के बीच सामंजस्य की कमी के चलतें इसका औपचारिक रूप से उद्घाटन अब तक नहीं हो सका है। बिना उद्घाटन के ही स्थानीय व बाहर से आनें वालें पर्यंटक परिक्रमा पथ का आनंद उठा रहे है। सामान्य वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आनें वालें बम्लेष्वरी पहाड़ी में छत्तीसगढ़ की 36 देवियों के दर्षन हो सकेगा। यहां पर प्रदेष के अलग-अलग स्थानों में विराजित देवियों की मूर्ति स्थापित की गई है। उपर पहाड़ पर स्थित मां बम्लेष्वरी दर्षन के बाद दर्षनार्थी परिक्रमा पथ में भी छत्तीसगढ़ के 36 देवियों का दर्षन कर सकेंगे। इसके अलावा यहां पर प्राकृतिक जल धाराओं के उपर लोहे के सात ब्रिज बनाएं गए है। जिसे भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने वन विभाग को निःषुल्क उपलब्ध कराया है। लोहे के तीन बड़े ब्रिज के अलावा चार छोटे ब्रिज बनें है। बारिष के दिनों में इन ब्रिज के नीचें से प्राकृतिक जलधारा बहती है। मानसून के दस्तक के बाद परिक्रमा पथ व बम्लेष्वरी पहाड़ में हरियाली की छटा और बिखरेगी। पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के कार्यकाल में ही निर्माण पूरा हो गया है। लेकिन तीन वर्शों से औपचारिक रूप से लोकार्पण का ही इंतजार हो रहा है। इसे लेकर अफसर भी असमंजस में बनें हुए है और जवाब नहीं दे पा रहे।
3 करोड़ 15 लाख 97 हजार किया गया खर्चः बम्लेष्वरी पहाड़ में पर्यावरण प्रकृति भ्रमण पथ 1 करोड़ 38 लाख 25 हजार तथा सीढ़ीनुमा वन विचरण मार्ग के लिए 1 करोड़ 77 लाख 72 हजार रूपए इस तरह से दोनों कार्य के लिए तीन करोड़ 15 लाख 97 हजार रूपए खर्च किया गया है। देवी दर्षन के बाद श्रद्धालुओं को परिक्रमा पथ में प्रकृति से सीधे जुड़नें का अवसर मिलेगा। इसके अलावा भविश्य में विचरण मार्ग में और भी सुविधाएं विकसित करनें के लिए वन विभाग प्राकलन तैयार कर रही है।
परिक्रमा पथ के बगल में मेडिटेषन सेंटर भी- प्रसाद योजना के तहत परिक्रमा पथ के बगल में मेडिटेषन सेंटर, ओपन एयर थियेटर व मोटल का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। बाहर से आनें वालें दर्षनार्थियों को एक ही जगह पर सुविधाएं मिलेगी। खासकर विदेषी पर्यंटकों को विष्व स्तरीय सुविधाएं देनें के लिए प्रसाद योजना के माध्यम से निर्माण किया जा रहा है। विदेष से आनें वालें पर्यंटकों को वन विचरण मार्ग में प्रकृति से रूबरू होनें का खास अनुभव मिलेगा साथ ही भारत के औशधीय पौधों का ज्ञान व महत्व को भी समझ पाएंगे।
देख-रेख के अभाव में टाॅयलेट्स हो गए खस्ताहाल- परिक्रमा पथ में घूमनें आनें वालें लोगों के लिए टाॅयलेट्स बनाएं गए है। लेकिन देख-रेख के अभाव में सभी टाॅयलेट्स खस्ताहाल हो गए। दरवाजों को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है और सफाई नहीं होनें से गंदगी फैल गई है। औपचारिक रूप से लोकार्पण होनें के बाद से ही परिक्रमा पथ के मेंटेनेंस को लेकर जिम्मेदारी तय की जाती। परंतु तीन वर्शों से केवल लोकार्पण का ही इंतजार किया जा रहा है। आम लोगों के लिए इसे विधिवत रूप से नहीं खोला गया है।
ये तो उच्चाधिकारी ही बता पाएंगेः रेंजर कुर्रे- सामान्य वन परिक्षेत्र के रेंजर आरआर कुर्रे ने बताया कि लोकार्पण के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। अब तक इसका उद्घाटन क्यों नहीं हो पाया है ये तो उच्चाधिकारी ही बता पाएंगे।

साउथ अफ्रीकन दुर्लभ प्रजाति का कछुआ को माह भर घर में रखा, वन विभाग ने जंगल सफारी भेजा
ग्राम अछोली में विमल यादव की बेटी चंचल को महीनें भर पहलें सोसायटी के समीप दुर्लभ प्रजाति का कछुआ मिला। महीनें भर बाद जब वन विभाग को इसकी जानकारी मिली तो कछुआ को रायपुर स्थित जंगल सफारी भेज दिया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी आरआर कुर्रे ने बताया कि यह भारत का नहीं बल्कि साउथ अफ्रीकन के दुर्लभ प्रजाति का कछुआ है। यह अछोली तक कैसे पहुंचा इसका कोई तथ्य तो नहीं मिला है। लेकिन यह पानी में न रहकर मैदानी व जंगल में घूमकर रहता है। माह भर पहलें विमल यादव की बेटी चंचल ने इसे देखा। सामान्य दिखनें वालें कछुआ से यह अलग दिखा तो चंचल पहलें तो डर गई। लेकिन हरकत से कछुआ होनें का आभास हुआ। जिसे वह अपनें घर ले आई। पानी में डालनें पर अफ्रीकन कछुआ बाहर निकलनें के लिए भरसक प्रयास करता रहा। कछुआ को खानें में भिंडी, कुंदरू, मुर्रा व अन्य हरी सब्जियां दी जाती थी। वन विभाग के अफसरों के अनुसार साउथ अफ्रीकन कछुआ षाकाहारी है और पानी में न रहकर जंगल में घूमकर अपना भोजन तलाष करता है। जंगल सफारी भेज दिया गया- षनिवार को वैद्य कल्याण संघ के प्रदेष अध्यक्ष कन्हैया लाल साहू को जानकारी मिली। अछोली जाकर दुर्लभ कछुआ को देखा और उन्होंने खैरागढ़ डीएफओ संजय यादव को सूचना दी। जिसके बाद वन विभाग की टीम को भेजकर विमल यादव के घर से कछुआ को लेकर जंगल सफारी के लिए रवाना हुई। वन विभाग के अफसर भी हैरान है कि साउथ अफ्रीका में पाएं जानें वाला दुर्लभ प्रजाति का कछुआ अछोली तक कहां से पहुंच गया।

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