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कफ सीरप बना नशे का सामान

संजय महिलांग/नवागढ़ : नवागढ़ के युवाओं में बढ़ती नशे की लत के बीच खासी की दवा खास पंसद बनती जा रही है। नगर समेत ग्रामीण इलाकों मे किशोरों की जमात नशा करने में जुटी है। उनके लिए खांसी की दवा कॉरेक्स, फेन्साड्रील, डाइलेक्स है ये दवा कफ से मुक्ति दिलाती है। लेकिन यह दवा उन किशोरों को नहीं मिल पाती है तो उन्हें खांसी आने लगती है। दरअसल इन दवाओं का सेवन से युवकों में नशा की जरुरते पूरी हो जाती है। शराब की तरह गिलास का उपयोग नहीं करते हैं ये दवा एक ही सांस में पूरी शीशी को गटक लेते है और नशा भी हो जाता है। मुंह से शराब की तरह बदबू भी नहीं आती है। नशा को लेकर आयोडेक्स तथा सूंघने वाली व्हाइटनर दवाएं भी इस जमात की रोजाना जरुरतों में शामिल है। अब तो सरकारी अस्पताल में मुफ्त में खांसी की दवा भी उपलब्ध है लेकिन जैसे ही इन युवाओं को जानकारी मिलती है कि कफ सीरप उपलब्ध हो गया है। तरह तरह के बहाने बनाकर कफ सीरफ पाने की जुगत भिड़ाने लगते है। फलत: अस्पताल में कफ सीरप का अभाव बना रहता है। कई ऊंचे घराने के युवक इन दवाओं का सेवन धड़ल्ले से करते है। इन्हें सुविधा यह होती कि नशा का एहसास भी हो जाता है और किसी को पता भी नहीं चलता है।

00 कफ सीरप का सेवन करने से शरीर में चुनचुनाहट, लाल-लाल धब्बे व दाना निकलने लगता है। लगातार कफ सीरप पीने से शरीर को काफी नुकसान होता है। कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। डाक्टर की सलाह के बाद ही किसी प्रकार की दवा लेनी चाहिए।
अवैध नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर को पत्र लिखा गया है जल्द ही करवाई की जाएगी।

डॉक्टर बूधेश्वर वर्मा
ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी नवागढ़

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