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मार्केट से उधार में मटेरियल लेकर सरपंचों ने कराया काम, तगादा कर रहे व्यापारी, ब्लाॅक में 1 करोड़ 57 लाख रूपए का भुगतान लंबित

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तिलकराम मंडावी/डोंगरगढ़ : ब्लाॅक में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से पंचायतों में विकास कार्य हुए है। लेकिन कार्य पूर्ण होनें के बावजूद मटेरियल भुगतान अब तक लंबित है। इसके चलतें सरपंचों पर मार्केट में उधार हो गया है और व्यापारी अब उनके घर पहुंचकर तगादा कर रहे है। बताया गया कि डोंगरगढ़ ब्लाॅक में मनरेगा से कराएं गए कार्यों के मटेरियल भुगतान की एक करोड़ 57 लाख रूपए लंबित है। सरपंच रोजाना जनपद पंचायत मुख्यालय पहुंचकर संबंधित अफसरों से संपर्क कर रहे है, लेकिन अब तक उन्हें मटेरियल की राषि का भुगतान नहीं हो पाया है। जबकि सरपंचों ने काम करानें के लिए मार्केट के दुकानों से उधार में सामान लिया है। उधार की मियाद खत्म होनें के बाद व्यापारी अब सरपंचों को भुगतान के लिए परेषान करनें लगें है। मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा के माध्यम से आंगनबाड़ी भवन, गोठान, धान चबूतरा, मुक्तिधाम, खाद्य गोदाम समेत अन्य निर्माण कार्य साल भर में हुए है। ग्रामीण सत्ता में नई सरकार के काबिज होनें के बाद कोरोना संकटकाल षुरू हो गया और काफी समय तक विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित रहे। लेकिन इसी बीच ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मुहैया करानें के लिए मनरेगा के तहत रोजगार मूलक कार्य हुए। मजदूरों को मजदूरी का भुगतान को नियमित हुआ है, परंतु उसी कार्य के मटेरियल का भुगतान अब तक लंबित ही है। ब्लाॅक के ग्राम पंचायतों में करीब एक करोड़ 57 लाख रूपए के मटेरियल का भुगतान लंबित है। सरपंच पंचायती कार्यों के लिए उधार लेकर कर्ज में दब गए है। व्यापारी लगातार दबाव बनाकर उन्हें परेषान कर रहे है।
मजदूरी भुगतान नियमित हो रहा, गांव में मिल रहा रोजगार- मनरेगा के माध्यम से गांवों में रोजगार मूलक कार्य हो रहे है। मजदूरों को मजदूरी भुगतान नियमित हो रहा है। किंतु उसी कार्य के तहत मटेरियल का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिल रहा है। कोरोना संकटकाल में ग्रामीणों को काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है। किंतु अब मटेरियल भुगतान नहीं होनें की वजह से सरपंच नया कार्य षुरू नहीं कराना चाह रहे है। जबकि बारिष षुरू होनें से पहलें ही रोजगार गारंटी के कार्य बंद होंगे। मटेरियल भुगतान नहीं होनें के चलतें ही सरपंच नया कार्य करानें के लिए रूचि नहीं ले रहे है।
मार्केट में सरपंचों की छवि धूमिल हो रही- ब्लाॅक सरपंच संघ के अध्यक्ष आबिद खान ने कहा कि ग्राम पंचायत के एजेंसी सरपंच तत्काल अपनें पंचायत के निर्माण कार्य गांव के विकास व मजदूरों को कार्य मिलता रहे इसी उद्देष्य से अधिकतर ग्राम पंचायत कार्य पूर्ण कर लिए है। मगर मटेरियल भुगतान का इंतजार कर रहे है। अधिकारियों के सुस्त रवैया के चलतें अब तक मटेरियल भुगतान प्राप्त नहीं होनें से जनपद पंचायत डोंगरगढ़ के सरपंच कर्ज में दब गए है। एक तरफ कोरोना संक्रमण से स्थिति खराब है। वहीं दूसरी ओर सरपंच मटेरियल सप्लायरों को भुगतान नहीं होनें से मार्केट में उनकी छवि भी धूमिल हो रही है। ऐसा ही रवैया बना रहा तो ब्लाॅक के सरपंच डिफाॅल्टर घोशित हो जाएंगे।
कांग्रेस सरकार ने जनप्रतिनिधियों को कंगाल बना दिया- ग्राम पंचायत मक्काटोला के प्रधान व भाजपा युवा नेता हेमलाल वर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी कंगाल कर दिया है। मनरेगा की राषि आनें के बाद राज्य व जिला स्तर पर रोककर रखा गया है। जबकि कार्य पूर्ण होनें के बाद जनपद से मटेरियल का भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सरपंचों को कर्ज में दबकर रहना पड़ रहा है। राज्य में सत्ता में काबिज होनें के बाद ग्राम पंचायतों में विकास कार्य भी ठप्प पड़ गया है। वहीं जो कार्य हो रहे है उनका भी भुगतान नहीं हो पाना कांग्रेस सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
राज्य से फंड नहीं आया-कचलामः जनपद पंचायत सीईओ लक्ष्मण कचलाम ने बताया कि मनरेगा के मटेरियल की राषि का भुगतान राज्य स्तर से लंबित है। हमनें इसकी पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी है। राज्य से फंड आनें के बाद ही संबंधित ग्राम पंचायतों को मटेरियल की राषि का भुगतान किया जाएगा।

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