बिलासपुर : प्रदेश में सैकड़ों कोविड मरीजों की समय पर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर नहीं मिलने के कारण मौत हो रही है, लेकिन सरकार ने आज हाईकोर्ट में इनकी किसी भी प्रकार की कमी से मना कर दिया। छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में 7500 ऑक्सीजन बेड हैं, जिसमें से इस समय 2000 से ज्यादा खाली हैं। इसी तरह एचडीयू और आईसीयू के बेड भी खाली हैं। आज की स्थिति में 242 वेंटिलेटर भी उपलब्ध हैं।
इन आंकड़ों को सुनकर कोर्ट की डिविजनल बेंच ने सवाल उठाया कि फिर दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर जिलों मेंं मरीज भटक क्यों रहे हैं। इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि इन जिलों में मरीज ज्यादा हैं, लेकिन आज की स्थिति में यहां भी कुछ बेड खाली हैं। रायपुर में तो 112 वेंटिलेटर खाली हैं और ऑक्सीजन के 700 बेड उपलब्ध है। कोर्ट ने इन खाली बेड को जरूरतमंदों को देने के लिए सिस्टम बनाने कहा। सरकार की ओर से कहा गया कि वे एक वेब पोर्टल बनाकर उसमें रोज जानकारी अपडेट कराने का सिस्टम बनाएंगे।
रेलवे ने कहा हम नहीं दे सकते स्टाफ व सुविधाएं
कोरोना प्रबंधन की इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिका पर भी सुनवाई हुई। इसमें एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव और संदीप दुबे ने तर्क रखे कि रेलवे एसईसीआर इलाके में 23 छोटे बड़े अस्पताल का संचालन करता है, उनके पास स्टाफ , इन्फ्रास्ट्रक्चर सभी है, लेकिन वो अपने बनाए कोच में कोविड अस्पताल नहीं शुरू कर रहा है। इस तर्क के जवाब में रेलवे के अधिवक्ता ने कहा कि रेलवे के पास इस क्षेत्र में मात्र 3 अस्पताल हैं जो पहले से ही कोविड पेशेंट देख रहे हैं। उनके पास अपने कोच में तैनात करने के लिए डाक्टर स्टाफ और उपकरण नहीं हैं।
सोमवार को आएगा विस्तृत फैसला
कोरोना प्रबंधन की इस जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सोमवार को कोर्ट इस मामले में सरकार के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगी। इस सुनवाई के दौरान न्यायमित्र एडवोकेट प्रफुल्ल भारत ने बिलासपुर के सिम्स में विधायक के लिए वेंटिलेटर आरक्षित रखने के मुद्दे को भी उठाया, जिसका महाधिवक्ता ने खंडन किया।

