प्रांतीय वॉच

प्रधानमंत्री सड़क निर्माण के नाम पर हरे भरे वृक्ष धराशायी

  • प्रशासनिक अधिकारी कुछ सुनने को तैय्यार नही

किरीत ठक्कर/ गरियाबंद। धमतरी और गरियाबंद जिले की सीमा पर स्थित गांवो में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण में खुलेआम मनमानी की जा रही है। जिला मुख्यालय धमतरी के दूरस्थ वन क्षेत्र के गांव, अधिकारियों की पहुंच से बाहर है। गरियाबंद जिले की बार्डर से लगे हुए इन गांवों में सड़क निर्माण में ठेकेदार की मनमानी चल रही है , और तो और धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक के जिम्मेदार तहसीलदार , एसडीएम जैसे अधिकारी मोबाइल तक उठाने को तैयार नहीं है। विदित हो कि मगरलोड ब्लॉक की ग्राम पंचायत बोइरगांव अंतर्गत भोभलाबाहरा से मारागांव तक इन दिनों प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य में अमानक मिट्टियुक्त मुरुम उपयोग की जा रही है। बिना किसी लीज के इस मिट्टी युक्त मुरुम का खनन भोभलाबाहरा गांव के छिंद तालाब से किया जा रहा है। जबकि इस तालाब का गहरीकरण पहले ही मनरेगा के तहत लगभग 8 लाख रुपये की राशि से किया जा चुका है। अब इसमें गहरीकरण या अन्य किसी कार्य की आवश्यकता नहीं है और न ही पंचायत का कोई कार्य प्रस्तावित है फिर भी इस तालाब से लगी जमीन से ठेकेदार के द्वारा स्वार्थपूर्ति के लिए बेख़ौफ़ तालाब की मिट्टी खनन कर सड़क में बिछाई जा रही है। छिंद तालाब से लगी इस जमीन पर लगभग बारह से अधिक हरे भरे इमारती वृक्ष है , जेसीबी की मदद से इन वृक्षों के चारों तरफ की मिट्टी खोद डाली गई है जिससे अब इन वृक्षों का अस्तित्व समाप्ति की कगार पर है। दुगली वन परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर मधुकर इसे राजस्व की जमीन बता रहे हैं जहाँ से ठेकेदार द्वारा जेसीबी व चैनमोउंटिंग मशीनों की सहायता से बड़े पैमाने पर मिट्टी मुरुम का खनन व परिवहन किया जा रहा है। राजस्व तहसीलदार मगरलोड फोन रिसीव करने तैय्यार नही है, यही हाल एसडीएम कुरूद का है। ऐसा लग रहा है मानो पूरा धमतरी जिला प्रशासन लचर व्यवस्था का शिकार हो चुका है। बोइरगांव पंचायत सचिव का कहना है कि हमने खनन के लिए अनापत्ति पत्र दिया है किंतु खनन किस प्रकार हो रहा है इस अवैध खनन की चपेट में कितने हरे भरे वृक्ष धराशायी हो रहे हैं इस बाबत पंचायत प्रतिनिधियों को ना कोई जानकारी है ना जानने का प्रयास किया गया है। कुल मिलाकर मिलीभगत से प्राकृतिक संपदा की लूट के खेल में सब शामिल हैं जिसका खामियाजा आने वाली नस्लों को उठाना पड़ सकता है। चंद रुपयों की लालच में कुछ लोग पूरे मानव समाज के दुश्मन बन बैठे हैं। याद रखिये प्रकृति खुद पर लगी चोट या नुकसान पर कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया व्यक्त नही करती , किन्तु कभी ना कभी उसका प्रतिशोध , विनाश लेकर सामने आता है।

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