तिलकराम मंडावी/ डोंगरगढ़। नगर पालिका में अफसरषाही इस कदर हावी हो चुकी है कि सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों ने भी सीएमओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पखवाड़े भर से सीएमओ हेमषंकर देषलहरा दफतर ही नहीं पहुंच रहे है। कर्मचारी हस्ताक्षर करानें के लिए फाइल उनके घर लेकर जा रहे है। सत्ता हो या विपक्ष के जनप्रतिनिधि दोनों सीएमओ के खिलाफ हो चुके है और हटानें के लिए लामबंद है। षुक्रवार को इंदिरा नगर के बीड़ी श्रमिक कॉलोनी की महिलाएं फिर से नगर पालिका पहुंची और बेघर हुए लोगों के लिए आवास मांगा। लेकिन दफतर में सीएमओ नदारद थे। अध्यक्ष सुदेष मेश्राम महिलाओं के बीच पहुंचें लेकिन महिलाओं ने उनसें बात करनें से साफ इनकार कर दिया और सीएमओ से ही चर्चा करनें की मांग को लेकर दिनभर बैठे रहे। लेकिन सीएमओ दिनभर पालिका दफतर पहुंचें ही नहीं। महिलाओं की मांग थी कि आवास आवंटन में भेदभाव किया गया है। पात्र हितग्राहियों को अपात्र बताकर बेघर कर दिया है। इन्हें आश्रय स्थल में अस्थाई तौर पर पनाह तो दिया गया लेकिन अब तक इनके रहनें के लिए स्थाई रूप से व्यवस्था नहीं की गई है। जानकारी मिलनें के बावजूद सीएमओ धरनें पर बैठी महिलाओं से मिलनें नहीं पहुंचे। जनप्रतिनिधि व सीएमओ के बीच तकरार होनें से पालिका के कार्यों में सामंजस्य नहीं बैठ रहा है। सत्ताधारी जनप्रतिनिधि भी सीएमओ को हटानें की मांग पर है। विवाद के चलतें तालमेल नहीं बैठ रहा है। लेकिन विडंबना यह है कि उच्चाधिकारियों तक षिकायत पहुंचनें के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।
जानिए, महीनें भर में तीन बार विवादों में आ चुके सीएमओ
4 जनवरीः रिटायर्ड बैंक अफसर राजेंद्र मेश्राम के साथ 4 जनवरी को भवन अनुज्ञा प्रमाण-पत्र देने रिष्वत मांगनें को लेकर चेंबर में जमकर बहसबाजी हुई। सीएमओ इतनें आवेष में आ गए कि मामला गाली-गलौच तक पहुंच गया। मेश्राम मामलें को लेकर थाना तक गए लेकिन प्रकरण में कार्रवाई करनें की बजाय पुलिस ने महज खानापूर्ति कर ली। रिष्वत लेने के मामलें को लेकर चेंबर में हुए विवाद का वीडियों सोषल मीडिया में जमकर वायरल हुआ था।
11 जनवरीः गोबर खरीदी में धांधली को लेकर जब सीएमओ ने मिषन क्लीन सिटी प्रोजेक्ट के कर्मचारी पर कार्रवाई की। जिसके बाद 11 जनवरी को सत्ताधारी जनप्रतिनिधि एकजुट हुए और गोबर खरीदी की ही जांच करनें की मांग करनें लगे। यहीं से अफसर व जनप्रतिनिधियों में दरार और बढ़ी। क्योंकि जनप्रतिनिधि व सीएमओ अपनें चहेतों को फायदा दिलानें के लिए लगें हुए थे। अब चेक में हस्ताक्षर करनें को लेकर भी विवाद बरकरार है। गोबर खरीदी धांधली की जांच भी अटकी हुई है।
22 जनवरीः कई विशयों को लेकर अध्यक्ष सुदेष मेश्राम के चेंबर में पीआईसी की मीटिंग आयोजित थी। मीटिंग के दौरान गोबर खरीदी व अन्य बातों को लेकर मेंबरों व सीएमओ के बीच कहासुनी हुई। बात ऐसी बढ़ गई कि हाथापाई की नौबत आ गई। दोनों पक्ष मारपीट होनें की बात को लेकर थाना तक पहुंच गए। ऐसे में जब सत्ता के जनप्रतिनिधियों के साथ खींचतान व हाथापाई की स्थिति बन रही है तो सामंजस्य बनाकर काम नहीं हो सकतें। पीआईसी मीटिंग में विवाद के बाद नगर पालिका में काम लगभग ठप्प है।
षिकायत सीएम हाउस व मंत्री तक पहुंच चुकी
पब्लिक से लेकर कर्मचारी व सत्ता-विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के साथ सीएमओ का विवाद लगातार सामनें आया है। सीएमओ को हटानें की मांग को लेकर जनप्रतिनिधि लामबंद हो चुके है। जिसकी षिकायत सीएम हाउस व नगरीय प्रषासन मंत्री तक पहुंच चुकी है। परंतु अब तक कार्रवाई की दिषा आगें ही नहीं बढ़ी। लगातार विवाद से तकरार इतना बढ़ गया है कि विकास कार्यों पर इसका असर देखनें को मिल रहा है। साथ ही सामंजस्य नहीं बैठनें से पब्लिक भी नगर पालिका से दूरी बनाकर रखी हुई है।

