प्रांतीय वॉच

खाेखमा-घुमरापदर प्रधानमंत्री सड़क निर्माण में मापदंड दरकिनार जिम्मेदारों पर सवाल

टीकम निषाद/ देवभोग। पीएमजीएसवाई के करोड़ों की सड़क निर्माण इन दिनों अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की बलि चढ़ा रहा है।  साइड इंचार्ज एवं एसडीओ कार्यालय मैं बैठे-बैठे निरीक्षण करने का फायदा ठेकेदार जमकर उठा रहे हैं ।ऐसे ही खोखमा से घुमरापदर  तक प्रधानमंत्री सड़क निर्माण में देखने को मिल रहा है। करीब 16 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण में ना मापदंड का ख्याल रखा जा रहा है। और ना अधिकारी साइट पर मौजूद होते हैं। इस सड़क पर नाम मात्र का मुरूमीकरण किया जा रहा है। इसके साथ चुरा पत्थर डालकर सीधा रोलर चला रहे हैं ।जिसके चलते पहली बार के रोलर चलाने पर ही इस्तेमाल पत्थर चूरचूरा होकर मुरूमी के साथ दब रहा है ।इसके साथ थिकनेस में भी कांटा मारी किया जाता है ।जबकि नियमानुसार पहले सड़क की उबड खाबड को लेवल करते हुए जेसीबी और मशीन से डस्ट को अच्छी तरह साफ करना होता है। उसके बाद ही फर्स्ट लेयर डब्ल्यूबीएम किए जाने का प्रावधान है। लेकिन इस सड़क में किसी प्रकार मापदंड का पालन नहीं हो रहा है। जिससे इंजीनियर से लेकर कार्यपालन अभियंता भी अच्छी तरह अवगत हैं। मगर अफसोस की बात है कि कार्य में कसावट लाने की जगह ठेकेदार को गुणवत्ताहीन कार्य करने के लिए खुली  छुठ दिया  है। यही वजह है कि पीएमजीएसवाई की सड़क समय से पहले खराब हो जाती है ।जहां दुपहिया चार पहिया से आवागमन करना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है ।ग्रामीणों का कहना है कि काफी जद्दोजहद के बाद खाेखमा से घूमरपदर  तक सड़क की स्वीकृति मिली लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से ठेकेदार गुणवत्ताहीन कार्य कर शासन को लाखों की चपत लगा रहे हैं। क्योंकि निर्माण कार्य में जिस तरह के मटेरियल का इस्तेमाल हो रहा है। उससे अभी सड़क दबने लगी है । यहां बताना लाजिमी होगा कि करोड़ों की सड़क निर्माण मैं अधिकारी ठेकेदार के भरोसे होते हैं। जिसके कारण मापदंड का पालन पूरी तरह नहीं हो पाता बल्कि मटेरियल में और भी ज्यादा कांटा मारी किया जाता है। ऐसे में गांव की सड़क  कुछ महीनों तक ही मुख्य मार्ग से जुड़ पाती है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी धरातल में उतरकर गुणवत्ता पूर्वक सड़क निर्माण कराने के लिए गंभीर नजर नहीं आते।
आर पी पटेल एसडीओ पीएमजीएसवाई :  हमने निरीक्षण कर अच्छी तरह पानी डालने और रोलर चलाने के लिए कहा है और पत्थर भी मजदूरों से  तुडवाकर डाला जा रहा है

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