टीकम निषाद/ देवभोग : उपार्जन केंद्रों में अपनी धान बेचने के बाद अब किसानों को राशि निकालने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ रहा है। दूरदराज के किसानों तय तिथि पर कड़कड़ाती ठंड में रात 12 बजे से बैंक के बाहर अपना अपना पासबुक रखकर रतजगा करते हैं ।और पूरी रात काटने के बाद सुबह कहीं जाकर बमुश्किल राशि निकाल पाते हैं। क्योंकि अक्सर बैंक के भीतर और बाहर दलालों का बोलबाला रहता है। इसलिए किसान पूरी रात काट कर भी राशि निकालने के लिए मजबूर है। हालांकि अब तक 4000 से अधिक किसानों को जिला सहकारी बैंक द्वारा एटीएम कार्ड वितरण किया जा चुका है। बावजूद इसके आय दिन सैकड़ों की तादाद में किसान बैंक पहुंच रहे हैं। जानकारी अनुसार रोहनागुडी लाटापारा दीवानमुड़ा झिरीपानी सहित अन्य समिति के 94 गांव के किसानों के लगभग 9000 खाताधारी है। जिनके राशि निकालने के लिए अलग-अलग तिथि भी तय किया गया है। मतलब 1 दिन में 20 गांव के करीब 400 किसान काे तैयार ही अपनी धान की राशि मिल पाती है। और बचे किसानों को वापस निराश होकर घर लौटना पड़ता है। और ऐसे कई किसान आय दिन मायूस चेहरा लेकर घर लौटते हैं ।यही वजह है कि अधिकांश किसान रात 12 बजे से बैंक के बाहर रहकर सुबह विडराल फार्म लेकर सबसे पहले राशि निकालने की हूड में लगे होते हैं । हालांकि किसानों की भी मजबूरी है। क्योंकि वर्तमान स्थिति में किसानों को काफी ज्यादा पैसे की जरूरत बताई जाती है ।इसलिए रतजगा कर भी राशि निकालने को मजबूर है। इस बीच दलाल और बिचाैलिया भी मालामाल हो रहे हैं। अपनी पहुंच और रूसुकदारी का धाैंस दिखा कर अपनी राशि निकाल रहे हैं। जिसकी चर्चा भी बैंक परिसर के भीतर जोरो शुरू से होती है । कि एक आेर रतजगा कर किसान राशि निकाल रहे हैं । तो वहीं दूसरी ओर दलाल एवं बिचाैलिया अपनी सेटिंग कर उन किसानों से पहले राशि निकालने में कामयाब है। जिसके चलते अक्सर किसानों और दलाल बिचाैलिया के बीच जुबानी बहस भी देखने को मिलता रहता है। इसलिए बैंक कर्मियों द्वारा गेट पर ताला लगाना मजबूरी होती है।
12 बजे से रतजगा कर किसान बेची धान की राशि को निकालने के लिए बेबस

