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बड़े पिताजी के जमीन को दो सगे भाइयों ने साजिश रचकर किया अपने नाम

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पुरूषोत्तम कैवर्त/ कसडोल : कहा जाात है कि पैसा है तो सब हैै, क्योंकि पैसा से बड़ा- बड़ा काम बन जाता है। चाहे काम जायज हो या नाजायज ऐसे उदाहरण अनेकों मिलते हैं। छत्तीसगढ़ी कहावत “सबले बड़े रुपैया, ददा चिन्हे न भईया”को चरितार्थ करने वाला एक मामला बलौदाबाजार जिला के कसडोल विकासखंड के अन्तर्गत ग्राम कटगी से प्रकाश में आया है जिसमें दो सगे भाइयों ने साजिश कर अपने ही बड़े पिताजी के जमीन को अपने नाम पर कर लिये।

मामला इस प्रकार है- आवेदिका गंगाबाई पिता खेमचंद बराई उम्र 55 वर्ष ग्राम कटगी के पिताजी लोग तीन भाई खेमचंद, लालसिंग एवं नेकराम थे। तीनों का आपसी बंटवारा हो चुका था, जिसमें आवेदिका के पिता को बंटवारा पश्चात भूमि खसरा नंबर 1200/1,1502/2,1175/3,1179/3,1273/2 रकबा क्रमशः 0.059 हे.,0.087 हे.,0.214 हे.,0.263 हे.,0.075 हे. भूमि प्राप्त हुआ था जिसपर आवेदिका के पिता अपने जीवनकाल में कास्त काबिज रहे। आवेदिका गंगाबाई की शादी ग्राम बलौदा (अकलतरा) में होने के बाद ससुराल में अपना दाम्पत्य जीवन निर्वहन करने लगी। मायका आना जाना बहुत कम हो गया। आवेदिका गंगाबाई पिता खेमचंद तरफ से उनके मुख्तियार संतोष थवाईत पिता फिरतराम उम्र 50 वर्ष ग्राम कटगी ने आरोप लगाया है कि इश्वरी पिता नेकराम उम्र 50 वर्ष जाति बराई एवं गजानंद पिता नेकराम बराई उम्र 45 वर्ष दोनों निवासी ग्राम कटगी प ह नं.18 रा नि मं. व तहसील कसडोल, जिला बलौदा बाजार – भाटापारा, छ. ग. ने मौके का फायदा उठाकर दोनों भाई एक राय होकर आवेदिका के पिता खेमचंद के सम्पूर्ण भूमि को साजिश पूर्वक अपने नाम करा  लिये जिसकी जानकारी आवेदिका गंगाबाई को होने पर माननीय व्यवहार न्यायालय कसडोल में वाद प्रस्तुत की, लेकिन उनके वाद को खारिज कर दिया गया। इसका अपील बलौदाबाजार में किया गया, वहां भी उनके अपील को निरस्त कर दिया गया। उसके पश्चात आवेदिका गंगाबाई ने माननीय सत्र न्यायालय बलौदाबाजार के पारित निर्णय के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील प्रस्तुत की है। तब से आज पर्यन्त माननीय उच्च न्यायालय में अपील लंबित है। आवेदिका के मुख्तियार संतोष थवाईत ने बताया कि खेमचंद को प्राप्त बंटवारा भूमि को इश्वरी एवं गजानंद बिना स्वत्व/आधिपत्य से प्राप्त उपरोक्त भूमि में से खसरा नं.1179/3 रकबा 0.263 हे. भूमि के कुछ भाग पर मकान का निर्माण कर रहे हैं तथा खसरा1175/3 रकबा 0.214 हे. भूमि को आवासीय प्लाट बनाकर 10 – 12 लोगों के पास बेंच दिए हैं, जिसपर मकान निर्माण कराया जा रहा है। इस निर्माण पर भी रोक लगाने की मांग की है। इस तरह आवेदिका अपने पैतृक भूमि को पाने दर दर भटक रही है। फिलहाल मामला उच्च न्यायालय में अभी लंबित है। इस संबंध में अनावेदक इश्वरी बराई से मुलाकात कर जानकारी लेने पर बताया कि हम पर लगाया जा रहा आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है। आरोप लगाने वाले अपनी सारी संपत्ति बेंच चुके हैं। हम अपनी भूमि पर काबिज हैं। उल्टे चार सौ बीसी कर पटवारी को पिला खुलकर हमारे हिस्से की भूमि पर अपना नाम जुड़वा दिए थे जिसकी जानकारी होने पर माननीय तहसीलदार कसडोल में लिखित शिकायत हमारे द्वारा की गई थी। इस बात को पटवारी ने स्वीकार किया और तहसीलदार को शपथ पत्र देकर माफी मांगा। फिर तहसीलदार द्वारा उनके द्वारा फर्जी तरीके से जोड़े गए नाम को काटने का आदेश दिया गया था। हमारे पास समस्त सबूत है। सिर्फ उनके द्वारा हमें परेशान किया जा रहा है, और कुछ नहीं है। दूध का दूध और पानी का पानी हो जावेगा।

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