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सुपोपषण के क्षेत्र में बीजापुर जिले में लिखा जा रहा है नया आयाम, नवजात शिशु के लिए अहम होते हैं, पहले सुनहरे 1,000 दिन

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समैया पागे/ बीजापुर। महिलाओं और बच्चों के सुपोषण के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग एक जिम्मेंदार पालक की तरह कार्य कर रहा है। नवजात बच्चे के लिए पहले सुनहरे 1,000 दिन काफी महत्वपूर्ण होते है, इस संदेष के साथ कलेक्टर रितेष अग्रवाल के मार्ग दर्षन में जिले में कई कारगार एवं प्रभावी कार्य किये जा रहे है, जिसमें मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान एवं महतारी जतन योजनांतर्गत गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में कुल 3327 गर्भवती महिलाएं प्रतिदिन गरम भोजन प्राप्त कर रहीं हैं ऐसे ही विभिन्न प्रयासों से गर्भवती माताओं को प्रतिदिन आंगनबाडी केन्द्र आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, उनका नियमित स्वास्थ्य जॉच एवं टीकाकरण किया जा रहा है। उन्हे पात्रता अनुसार प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मनरेगा मातृत्व भत्ता भगिनी प्रसुति योजना का लाभ देने के लिए आंगनबाडी केन्द्र एवं स्वास्थ्य केन्द्र में प्रचार-प्रसार व पंजीयन भी किया जा रहा हैं। जिले में 01 अक्टूबर 2019 से कुपोषण मुक्ति हेतु विषेष कार्ययोजना तैयार कर अंर्तविभागीय समन्वय तथा सामुदायिक सहभागिता से अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत प्रत्येक कुपोषित बच्चें की प्रतिदिन आंगनबाडी केन्द्र में उपस्थिति, पोषण आहार प्रदाय, गृहभेंट एवं सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों के माध्यमों से पोषण स्तर में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। वही महतारी जतन योजनांर्तत गर्भवती माताओं को निकट के आंगनबाडी केन्द्रों में गरम भोजन कराया जा रहा है। इसी तरह कुपोषित बच्चों का नियमित स्वास्थ्य जॉच एवं गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए विषेष स्वास्थ्य षिविर का आयोजन भी किया जा रहा है, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजनांतर्गत इस वर्ष अब तक 1367 बच्चों का स्वास्थ्य जॉच कर 234 गंभीर कुपोषित बच्चों को नि:षुल्क दवा का वितरण किया गया है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जिले में 04 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं, जिसमें नियमित रूप से बच्चे को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। अतिगंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में इलाज कर सुपोषित किया गया है। पोषण पुनर्वास केन्द्र में 14 दिवस का लाभ लेने के बाद घर पर बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विषेष ध्यान देने के लिए अभिभावको की काउंसलिंग स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत 1 से 3 वर्ष तक के सभी बच्चों, गर्भवती माताओं, षिषुवती माताओं, शाला त्यागी किषोरी बालिकाओं, को अण्डा, मूंगफल्ली चिक्की, पौष्टिक बिस्कीट के साथ गरम भोजन भी आंगनबाडी केन्द्रों के माध्यम से प्रदाय किया जा रहा है। कुल जिले में 42402 हितग्राहियों को गर्म भोजन से लाभान्वित किया जा रहा है। 15 से 49 आयु वर्ग की चिन्हांकित एनीमिक महिलाओं को गरम भोजन भी आंगनबाडी केन्द्र के माध्यम से प्रदाय किया जा रहा है, इसके साथ ही साथ किषोरी बालिकाओं एवं एनीमिक महिलाओं का नियमित काउंसलिंग भी किया जा रहा है। कुपोषण से बचाव के लिए नियमित केन्द्रों के माध्यम से सास बहु सम्मेलन, परिवार सम्मेंलन, स्व सहायता समूह की बैठक का आयोजन बच्चों की देखभाल, पोषण, स्वास्थ्य एवं साफ सफाई की जानकारी भी दिया जा रहा हैं। कलेक्टर रितेष अग्रवाल के मार्गदर्षन में 272 आंगनबाडी केन्द्रों में पक्का पोषण वाटिका का निर्माण कर मूंगा, पपीता के साथ मौसमी साग भाजी लगाया गया है, साथ 812 अन्य स्थानों पर आंगनबाडी कार्यकर्ता, सहायिका के घरों में पोषण बाडी का निर्माण किया गया है और हितग्राहियों के घरों में भी मूंगा, पपीता का पौधा रोपण का कार्य कर उन्हे साग भाजी लगाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। इस दौरान आंगनबाडी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं को नियमित रूप से प्रषिक्षण देकर कोविड नियमों के दिषानिर्देष का पालन करते हुए केन्द्रों में बच्चों एवं महिलाओं का हाथ धूलाई का कार्य करते हुए कोरोना संक्रमण से बचाव की भी जानकारी दिया जा रहा है। इस अभियान मे नियमित जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जा रहा हैं। इन्ही सब प्रयासों का ही परिणाम है कि 13 माह में 10 प्रतिषत कुपोषण में कमी हुआ है।

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