अक्कु रिजवी/ कांकेर। ज़िला उत्तर बस्तर कांकेर की तमाम देसी विदेशी मदिरा दुकानों में तमाम तरह की अनियमितताएं तथा गड़बड़ियां तो पहले से ही मौजूद हैं ।अब इनमें अहाता घपला के नाम से एक नया किस्म का घोटाला उजागर होता जा रहा है । जिले की देसी विदेशी दारू दुकानों में वहीं बैठ कर पीने के लिए जैसा कि बड़े शहरों में बार रूम होता है, यहां टीन शेड और बैठने का थोड़ा बहुत इंतजाम कर एक अहाता बना दिया जाता है, जिसे स्थानीय मदिरा प्रेमी अहाता या हाता के नाम से जानते हैं। आबकारी विभाग की नियमावली के क्रमांक 30 पर स्पष्ट उल्लेख है कि जहां भी इस प्रकार के अहाते होंगे, वहां सरकारी लाइसेंस शुल्क देय होगा। बिना लाइसेंस के मदिरा दुकान में पीने बैठने के लिए अहाता बनाने की अनुमति नहीं होगी और इस नियम का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्यवाही सख़्ती से की जाएगी। इस नियम का कांकेर जिले में तो पालन शायद ही किसी मदिरा दुकान में हो रहा होगा। हर जगह बिना लाइसेंस अहाता आराम से चल रहा है और मदिरा प्रेमी वहीं पी पीकर लुढक रहे हैं। जिले भर में हो रहे इस आबकारी उल्लंघन के विषय में जब जिला आबकारी साहब से बात की गई तो वह पहले तो कोरोनावायरस- कोरोनावायरस जपते रहे फिर उन्होंने बड़ी मुश्किल से बताया ) कि अभी यह सब रद्द कर दिया गया है और जहां संचालित हो रहा है, उसे भी मना किया गया है आपकारी साहब की इस बात का गले उतरना मुश्किल ही है क्योंकि वास्तविकता कुछ और ही है। जिस भी मदिरा दुकान में देखिए बिना लाइसेंस अहाता संचालित हो ही रहा है, जिसे कोई नहीं रोक रहा , बिना लाइसेंस इतने सारे अहाते चलने के कारण सरकार को राजस्व की जो हानि हो रही है वह इतने दिनों में न जाने कितनी बड़ी रकम हो चुकी होगी…? इस राजस्व हानि की वसूली किस अधिकारी से की जाए..? यह जिला प्रशासन को तय करना है। साथ ही यह मालूम करना भी शासन के लिए आवश्यक है कि यह सारा कमीशन का खेल सिर्फ आबकारी साहब ही खेल रहे हैं…? अथवा उनके पीछे कुछ और सयानों का भी इशारा है।
कांकेर जिले की शराब दुकानों में बिना लाइसेंस अहाता- संचालन

