प्रांतीय वॉच

लवन रेन्जर सिन्हा उड़ा रहे आर टी आई का मख़ौल 

  • अपीलीय अधिकारी के आदेश की भी कर रहे अवहेलना 
  • दस्तावेज अवलोकन कराने के भय से भाग रहे मुख्यालय छोड़कर

कसडोल : वन परिक्षेत्र लवन के रेन्जर एन के सिन्हा द्वारा सूचना का अधिकार कानून का Iखुलेआम मख़ौल उड़ाया जा रहा है । अपीलीय अधिकारी के द्वारा दण्ड किए जाने एवं दस्तावेज अवलोकन करने के आदेश के बावजूद दस्तावेज दिखाने के बजाए जानकारी होने के बाद भी जानबूझकर मुख्यालय से बाहर चले जाते हैं । वन परिक्षेत्र लवन में पदस्थ रेन्जर एन के सिन्हा की स्वेच्छाचारिता एवं मनमानी आम आदमी ही नहीं बल्कि उसके ही अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारी भी परेशान हैं । रेन्जर एन के सिन्हा की मनमानी का ऐसा ही एक वाक़या सामने आया है प्राप्त जानकारी के अनुसार कसडोल निवासी प्रवीण ढोमने ने जन सूचना अधिकारी एवं रेन्जर एन के सिन्हा के पास सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर रेन्जर एन के सिन्हा के कार्यकाल में किए गए समस्त प्रकार के किए गए भुगतान  की छायाप्रति बकायदा शुल्क के रूप में 10 रुपये का भारतीय पोस्टल आर्डर प्रस्तुत कर मांग की थी जिस पर जन सूचना अधिकारी एवं रेन्जर द्वारा जानकारी 100 पृष्ठों से अधिक एवं किए गए भुगतान में मजदूरों के व्यक्तिगत बैंक खाता नम्बर दर्ज होने का हवाला देते हुए जानकारी देते से इनकार कर दिया ।जिससे क्षुब्ध होकर प्रवीण ढोमने ने प्रथम अपीलीय अधि  – कारी एवं वन मण्डलाधिकारी बलौदाबाजार आलोक तिवारी के पास अलील प्रस्तुत किया जिसमें सुनवाई के लिए नियत तिथियों में आवेदक तो उपस्थित होते रहे लेकिन जन सूचना अधिकारी एवं रेन्जर हर सुनवाई में अनुपस्थित रहे । जन सूचना अधिकारी एवं रेन्जर एन के सिन्हा की सुनवाई तिथियों में उपस्थित न होना आवेदक एवं अपीलीय अधिकारी के समझ से परे है फिर भी अपील में फैसला सुनाते हुए अपीलीय अधिकारी एवं वन मण्डलाधिकारी आलोक तिवारी ने जन सूचना अधिकारी एन के सिन्हा  को आर्थिक दण्ड स्वरूप आवेदक को एक दिन के परिक्षेत्र मुख्यालय बल्दाकछार आने जाने में लगने वाले वाहन के ईंधन व्यय रुपए 170 / – दिए जाने तथा दस्तावेज अवलोकन करने स्वयं उपस्थित होकर बुलाने का आदेश पारित कर दिया । अपीलीय अधिकारी के आदेशानुसार आवेदक प्रवीण ढोमने द्वारा उक्त जन सूचना अधिकारी को जब फोन पर सम्पर्क किया तो पहले कोरोना के चलते लॉक डाऊन का बहाना बना लॉक डाऊन के बाद आने कहा गया बाद में लोक डाऊन हटने के बाद जब संपर्क किया तो बुला लिया और स्वयं मुख्यालय से नदारत हो गया । इस बात की सूचना आवेदक द्वारा उसके उच्चाधिकारियों को दी गई तो उन्होंने उसे उपस्थित रहने आदेशित करने की बात कही ।उल्लेखनीय हो कि रेन्जर एन के सिन्हा द्वारा पूर्व पदस्थ रेन्जर के कार्यकाल में कराए गए कर्यो का भुगतान करने के बजाए फर्जी तरीके से मजदूरों के नाम पर रुपये आहरण करने की सूचना आवेदक को मिली थी उसके बाद आवेदक ने शिकायत की सच्चाई जानने आर टी आई के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन जन सूचना अधिकारी एवं रेन्जर एन के सिन्हा के अपील में उपस्थित न होना बाद में अपीलीय अधिकारी के पारित आदेश का अवहेलना किए जाने से उसके कार्यशैली पर सवालिया निशान तो लग रहे हैं साथ ही मिली शिकायत की सत्यता भी प्रमाणित होने का अनुमान है ।

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