राजशेखर नायर / नगरी। कोरोना के चैनल को तोडऩे के लिए जिला प्रशासन की ओर से यहां के नागरिकों की मांग पर 23 से 30 सितंबर तक नगरीय निकाय क्षेत्रों में लॉकडाउन लगाया गया है। इस दरम्यान नागरिकों से अच्छा प्रतिसाद मिला। कोरोना संक्रमण को रोकने नागरिकों ने स्वयं घरों में अपने को कैद कर लिया.. . सड़कोंं में वे ही लोग दिखे, जिन्हें अतिआवश्यक कोई काम था…..पुलिस प्रशासन की प्रशंसा करनी होगी कि उन्होंने लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए पूर्व की भांति अपनी कारगार भूमिका निभाया। अलबत्ता इस बार स्वयंसेवी संस्थाओं की निष्क्रियता ने हमें काफी निराश किया……। लगातार स्लम बस्तियों का निरीक्षण कर देखा कि गरीबों के घरों में भी चूल्हा जलता रहा। दो वक्त की रोटी केे लिए उन्हें किसी राइस के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ा…. सरकारी दफ्तर खुले रहे…. यहां नियमित रूप से कामकाज होते रहे। यह अलग बात है कि आम नागरिक, अपनी समस्याएं लेकर ज्यादा नहीं पहुंचे…..जिला प्रशासन के मुखिया शुरू से ही लॉकडाउन के खिलाफ थे…. इसलिए लॉकडाउन के दरम्यान वे तटस्थ बन रहे… जब भी धमतरी के इतिहास में लॉकडाउन की चर्चा की जाएगी, तो पूर्व कलेक्टर रजत बंसल जी बहुत याद आएंगे…..जिले की जनता ने उन्हें लॉकडाउन के दरम्यान कई बार सड़कों पर कोरोना वारियर्स के साथ कदम से कदम मिलाते हुए देखा…..गरीबों के घरों मेंं राशन पहुंचाने से लेकर अपने मताहत कर्मचारियों का उन्होंने पूरा ख्याल रखा… बैरखैफ, कुछ लोग जो शुरू से लॉकडाउन का विरोध कर रहे थे….. वे सवाल उठा रहे है कि इसे लागू करने से फायदा क्या हुआ? लॉकडाउन को फायदा और नुकसान के तराजु में तौलने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि कोरोना के चैनल को तोडऩे के लिए सबसे कारगर उपाए सिर्फ लॉकडाउन ही है….। भारत समेत दुनिया के कई देशों ने उचित समय पर लॉकडाउन लगाकर कोरोना के प्रसार को रोकने में कारगार भूमिका निभाई है….. मैं यहां बताना चाहूंगा कि लॉकडाउन के पहले 22 सितंबर को धमतरी जिले में कोरोना के 872 एक्टिव मरीज थे। 28 सितंबर तक इनकी संख्या बढ़कर 880 हो गई। इस तरह सिर्फ 7 एक्टिव मरीज बढ़े हैं। इस दरम्यान 802 कोरोना मरीज नए मिले है जिसमें से 80 फीसदी रिकवर हुए….डब्लूएचओ के एक अधिकारी के अनुसार सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में कोरोना संक्रमण तेजी से दुनिया में फैला है, इससे भारत भी अछूता नहीं रहा, फिर भी धमतरी जिले में लॉकडाउन के चलते इस महामारी से काफी हद तक राहत मिली है। लॉकडाउन से प्रदूषण के स्तर में 30 फीसदी तक गिरावट आई है। लॉकडाउन के पहले एक्यूआई 101 से 150 तक था, जो घटकर 51 से 100 के बीच आ गया …… सड़कोंं में दुर्घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से कमी आ गई है। 22 सितंबर के पूर्व हर सप्ताह सड़क दुर्घनाटओं में जिले में औसत 2 से 4 लोगों की मौत होती थी, लेकिन लॉकडाउन के दरम्यान एक भी सड़क दुर्घटनाएं नहीं हुई। इसके अलावा शराब की वजह से होने वाली घरेलू हिंसा पर भी ब्रेक लगा…. कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि लॉकडाउन के चलते जिले में करोड़ों का व्यापार प्रभावित हुआ है। आर्थिक गतिविधियां थम गई है…. ऐसे लोगों के लिए मेरा एक ही जवाब है कि जान है तो जहान है। जिंदगी सलामत रहेगी, तो इंशा अल्लाह आर्थिक नुकसान की भी भरपाई हो जाएगी।
दोस्तों, अक्टूबर महीने में होने वाले प्रमुख त्यौहारों को देखते हुए मुझे पूरी उम्मीद है कि 30 सितंबर के बाद से धमतरी जिले में लॉकडाउन हटा लिया जाएगा…. एक जागरूक नागरिक होने के नाते मैं जिला प्रशासन से निवेदन करूंगा कि लॉकडाउन खुलने के बाद बाजारों में उमडऩे वाली भीड़ को नियंत्रित करे…. कुछ व्यवसायी मुनाफाखोरी करने से बाज नहीं आएंगे….इसे रोकने के लिए अधिकारियों की टीम बनाएं और कार्रवाई करें… शहरीय क्षेत्र की दुकानें सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक ही खुलने की छूट दी जाए….. अतिआवश्यक दुकानें, मेंडिकल, पेट्रोल पंप और दुग्ध पार्लर को खुले रहने की समय-सीमा रात 9 बजे तक हो…. दुकानों में सोशल डिस्टेटिंग का पालन नहीं कराने वाले व्यवसायियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए…. मॉस्क नहीं पहनने वाले नागरिकों पर जुर्माना की राशि बढ़ा दी जाए…. कलेक्टर और एसपी अधिकारियों की टीम के साथ हफ्ते में एक दिन मार्च-पास्ट कर नागरिकों को कोरोना से बचने के लिए सतर्क करते रहे…. कोरोना के जो पेसेंट होम आइसोलेशन में है, उनके घरों में जरूरी दवाईयोंं की आपूर्ति की उचित व्यवस्था की जाए….. व्यवसायिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं से भी निवेदन है कि कोरोना की रोकथाम के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग करें। अपने फंड से अस्पतालों में वेंटीलेटर समेत अन्य जरूरी दवाईयों की पूर्ति कराएं….।
आखिर में मैं यहीं कहूंगा :-
इन हालातों में भी अपनी एक पहचान हो गई….
देखकर जज्बा मुश्किलें बेजान हो गई…..
अंधेरी हैं रात हम मिलकर सुबह एक लाएंगे…..
भरकर ऊंची उड़ान, हम तराना नया गाएंगे…….

