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करोड़ों की लागत से बनी पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा गौरव पथ सड़क के जीर्णोद्धार का कब होगा कायाकल्प…!

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  • करोड़ों की सड़क गड्ढों  तथा धूल के कारण गौरव पथ सड़क के किनारे रहने वाले लोग परेशान है…।
  • ऐसा प्रतीत होता है कि गौरव पथ सड़क निर्माण भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया…।
  • रसों बाद मुख्य मार्ग का काम हो रहा है । वह भी इतने धीरे हो रहा है मानो उसे पंचवर्षीय योजना चलानी हो..।

कांकेर : शहर सेन चौक से पंडरीपानी होते हुए अमोडा की ओर जाने वाली करोड़ों रुपए लागत की बनी हुई सड़क जिसे अब तो शासन के दिए हुए गौरव पथ के नाम से पुकारने में भी शर्म आती है , इन दिनों बहुत बुरी हालत में है , जिसमें सेन चौक से शहर की सीमा तक इतने गड्ढे और धूल हैं कि नागरिक न केवल इससे परेशान रहते हैं बल्कि बीमार भी पड़ रहे हैं तथा गड्ढों के कारण कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी है , यह सब शासन को अच्छी तरह से मालूम है क्योंकि इधर से होकर बड़े बड़े अधिकारियों की गाड़ियां भी दिन में दो बार तो गुजरती ही होंगी , फिर भी महीनों हो गए , सड़क को दोबारा ठीक से बनाने , जीर्णोद्धार करने अथवा दिखावटी मरम्मत आदि करवाने की भी किसी अधिकारी ने न तो चिंता की है ना कोई परवाह की । ऐसा प्रतीत होता है कि सारे बड़े अधिकारी कांकेर बस्तर आकर अपने दिन गिनने लगते हैं कि कब यहां से भागे , अथवा कब यहां से ट्रांसफर ही अपने आप हो जाए….? यही कारण है कि शहर के विकास कार्य तो छोड़िए , यहां के छोटे-मोटे रूटीन कार्यों में भी कोई अधिकारी दिलचस्पी नहीं लेता , चाहे नागरिकों को कितनी भी तकलीफ क्यों ना हो जाए….? बरसों बाद मुख्य मार्ग का काम हो रहा है। वह भी इतने धीरे हो रहा है मानो उसे पंचवर्षीय योजना चलानी हो । ठीक इसी तरह इस तथाकथित गौरव पथ का भी निर्माण 5 वर्ष में भी ठीक-ठाक नहीं हो पाया है और उसे देखकर विश्वास करना कठिन है कि यह गौरव पथ है तथा मिनी बायपास रोड का एक अंग है । इस पर रात दिन वाहनों के द्वारा इतनी धूल  उड़ाई जाती है कि वह स्थानीय निवासियों के लिए तरह-तरह की बीमारियों का कारण बन गई है । वाहनों के कारण इतने गड्ढे हो गए हैं , पैदल या साइकिल भी चलना मुश्किल है लेकिन बड़े बड़े वाहन इस मार्ग को रात- दिन कुचलते रहते हैं। स्थानीय प्रशासन तथा राजधानी में भी अनेक बार शिकायतें की जा चुकी है लेकिन न जाने किस अज्ञात कारण से राजधानी के अधिकारी भी मौन धारण किए हुए हैं और स्थानीय अधिकारी तो सारी समस्या को हर दिन प्रत्यक्ष देखने के बाद भी छोटी मोटी मरम्मत भी कराने से परहेज कर रहे हैं । इसके कारण ठेकेदार की चांदी हो गई है । जनता के खजाने का इस प्रकार का दुरुपयोग उत्तर बस्तर जिले में देखने को मिल रहा है, उसे देखकर आम नागरिकों को बहुत दुख होता है कि क्या इसी का नाम विकास है….? या विकास के नाम पर खाऊपन ही होता रहेगा…..? सही मायने में देखा जाए तो गौरव पथ सड़क मार्ग में कई सरकारी ऑफिस भी हैं , जिनमें से एक मत्स्य विभाग भी है यहां कल हुई बारिश में पूरे ऑफिस के अंदर  पानी भर गया था । तालाब जैसा माहौल बन गया था..।।

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