नवागढ़ बेमेतरा संजय महिलांग
बेमेतरा जिले के नगर पंचायत नवागढ़ में रहने वाले, किशोर कुमार राजपूत एक प्रगतिशील किसान हैं। राजपूत पिछले कई सालों से गौ आधारित जैविक खेती करते हुए ‘मिर्च’ की देसी किस्मों को सहेज रहे हैं। अब तक वह अलग -अलग मिर्च की 500 से ज्यादा किस्मों को सहेज चुके हैं।
किशोर राजपूत ने बताया कि, मिर्च खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। लेकिन धान के कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धीरे-धीरे धान जैसे कैश क्रॉप के कारण,अब इनकी किस्म कम हो रही है। इसलिए हमें जितना हो सके इन्हें सहेजने पर जोर देना चाहिए।”
बचपन से ही अपने घर में अलग-अलग मिर्च फल की सब्जियां खाकर बड़े हुए किशोर जंगलों में जाकर भी मिर्च बीज की पौधें को ढूंढ़ते हैं।
किशोर राजपूत कहते हैं कि उन्होंने अलग-अलग आदिवासी समुदायों के साथ रहकर, इन मिर्च के प्रजातियों और इन्हें उगाने के प्राकृतिक तरीके सीखे हैं। वह जैविक तरीकों से ही खेती करते हैं और मिर्च के फसलों के साथ-साथ अन्य सब्जियां और फल भी उगा रहे हैं।
500 से ज्यादा किस्में सहेज रहे हैं
किशोर राजपूत बताते हैं कि उनके पास दो एकड़ जमीन है और इसके अलावा, वह जरूरत के हिसाब से जमीन लीज पर भी ले लेते हैं। उन्होंने बताया, “मैं अपने घर की बाड़ी पर 500 किस्म के मिर्च की पौधे उगा रहा हूं। साथ दूसरी सब्जियों के पौधें भी उगा रहे हैं।
वह आगे कहते है लगातार जैविक तरीकें अपनाएं तो आपको उत्पादन और गुणवत्ता बहुत ही अच्छी मिलती है। मैं खेती में गोबर की खाद, केंचुआ खाद और राख आदि का इस्तेमाल करता हूँ।”
धान की किस्में भी सहेजी
चावल छत्तीसगढ़ का मुख्य खाना है, लेकिन आज के समय में चावल की बहुत-सी देसी और पारंपरिक किस्में कहीं खो गयी हैं। क्योंकि,आजकल किसान सिर्फ बाजार की मांग के हिसाब से ही फसलें लगाते हैं। लेकिन किशोर का मानना है कि किसानों को अपनी विरासत को सहेजने के लिए भी देसी और पारंपरिक किस्में उगानी चाहिए। इसलिए वह चावल की अलग-अलग किस्में उगाते हैं और इसी तरह उन्होंने लगभग 200 प्रजातियों को सहेजा है। किशोर कहते हैं कि दूसरे किसान भी उनसे अलग-अलग प्रजाति के बीज लेकर जाते हैं।
“जैव विविधता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि किसान अपने खेतों में अलग-अलग किस्म की फसलें लगाएं। किसानों को इस बारे में जागरूक करने के लिए मैं महीने के हर दूसरे शनिवार को ट्रेनिंग सेशन आयोजित करता हूँ। मैं लोगों को लुप्त हो रही किस्मों के बारे में बताना चाहता हूँ ताकि हम अपनी देसी और पारंपरिक प्रजातियों को सहेज सकें।”
इसके अलावा, वह तुलसी, ब्राह्मी, नीम गिलोय जैसे लगभग 17 तरह के औषधीय पौधे भी लगा रहे हैं।
न सिर्फ छत्तीसगढ़ के, बल्कि देश के सभी किसानों के लिए किशोर राजपूत एक आदर्श किसान हैं। कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में बायोडायवर्सिटी अवॉर्ड 2021’ मिला है। इससे पहले उन्हें नेपाल के लुंबनी में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा अवॉर्ड 2021 भी मिला है।

