कमलेश लव्हात्रे/बिलासपुर : बौद्ध समाज, अंबेडकर युवा मंच, महिला सशक्तिकरण संघ ,भीम रेजीमेंट बिलासपुर द्वारा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम बाबा साहब की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं बुद्ध वंदना ग्रहण कर शुरुआत की गई तत्पश्चात आज के दिन के माता पर महत्ता पर प्रकाश डाला गया
वक्ताओं ने कहा-
_दुनिया के किसी भी व्यक्ति को इतनी भारी जिम्मेदारी नहीं मिली जितनी मुझे मिली थी “धर्म का चयन करना…” *बाबा साहेब_* ने यह बात कही
धर्म परिवर्तन के पहले बाबा साहब से प्रश्न पूछा गया कि *आप बौद्ध धम्म क्यों पसंद करते हैं ??
– बाबा साहब का उत्तर था मैं बौद्ध धर्म को प्राथमिकता इस वजह से देता हूं कि यह संयुक्त रूप से तीन सिद्धांतों को प्रतिपादित करता है जबकि अन्य कोई भी धर्म ऐसा नहीं करता।
– बाबा साहब कहते हैं कि अन्य सारे धर्म अपने आपको ईश्वर आत्मा तथा मृत्यु के बाद के जीवन में उलझाए रहते हैं। परंतु *बौद्ध धम्म प्रज्ञा अंधविश्वास और पारलौकिक के बजाए का उपदेश देता है।
– यह *करुणा (प्रेम) सिखाता है। – यह *समता *( समानता) की शिक्षा देता है। *और मनुष्य को इस धरती पर सुखी और प्रसन्न जीवन जीने के लिए इन्हीं बातों की आवश्यकता होती है।
बौद्ध धर्म के तीन सिद्धांत *प्रज्ञा/ करूणा/समता मुझे आकर्षित करते है।
*बाबा साहब का कहना था कि समाज की रक्षा ना ईश्वर कर सकता है और ना ही आत्मा।
– बाबा साहब कहते हैं कि मैंने महाभारत, भगवतगीता जैसी धार्मिक पुस्तकें पढी़ पर जब मैंने गौतम बुद्ध के बारे मे पढ़ा…इसका ऐसा प्रभाव पड़ा कि मैं उनका अनुयायी बन गया।
– *बाबा साहब के अनुसार हिंदुओं को भी अपनी भलाई के लिए बौद्ध धम्म अपना लेना चाहिए।
बाबा साहब नें इन्ही सब बातों के आधार पर *14अक्टूबर 1956 को हिन्दी धर्म का त्याग कर अपनें 5 लाख अनुनाईयो के साथ नागपुर की भूमि पर बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। जिस कारण उस भूमि का नाम दीक्षा भूमि पड़ा।
चूंकि आज धम्म ग्रहण करने का दिन है इसलिए आज *धम्म और धर्म की बात करनी आवश्यक थी।
अंत में बाबा साहब के महत्वपूर्ण विचारो को जानकर हमें इसका हल अवश्य ही निकालना होगा जिससे सभी जगह प्रज्ञा/करूणा/समता स्थापित हो सके। जिससे पूरे विश्व में सुख शांति का विचरण हो सके। और इसके लिए हमें पंचशील को गहराई से जानना होगा उसे जीवन में उतारना होगा। और ये पंचशील हैं।
– *मैं अकारण किसी भी प्राणी हिंसा से विरत रहूंगा/रहूंगी।
*- मैं किसी भी प्रकार की चोरी से विरत रहूंगा/रहूंगी।
*- मैं व्यभिचार से विरत रहूंगा/रहूंगी
*- मैं हर प्रकार के झूठ से विरत रहूंगा/रहूंगी।
*- मैं हर प्रकार के नशे से विरत रहूंगा/रहूंगी
अंत में नाश्ते मिष्ठान पुलिस वितरित किया गया जिसमें बौद्ध समाज के संरक्षक आयुष्मान हरीश वाहने जी नरेंद्र रामटेके जी अध्यक्ष सारंग राव हमने जी उपाध्यक्ष सुखनंदन मेश्राम जी कोषाध्यक्ष रोशन नागदौनें जी सचिव देवेंद्र मोटघरे के साथ-साथ डॉक्टर अंबेडकर युवा मंच से कुणाल रामटेके, मिलिन्द खोब्रागडे, लोकेश उके, वर्षा रामटेके, रश्मि नागदौने, सरगम हमने एवं टीम पंचशील बुद्ध विहार से कमलेश लव्हात्रे जी, योगेश मानवटकर जी एवं टीम महिला सशक्तिकरण टीम की अध्यक्षा वंदना भांगे जी एवं टीम भीम रेजीमेंट से सुनीता धीरज जी एवं टीम प्रफुल्ल गेडाम, छेदीलाल मेश्राम जी, साक्षर से शिक्षित की ओर के बच्चे और समाज के बहुत से महिला एवं पुरुष उपासक/उपासिकाएं उपस्थित हुए।।

