हरियाणा : मानवाधिकार आयोग ने बस यात्रा के दौरान यात्रियों के साथ कंडक्टर के दुर्व्यवहार को रिकॉर्ड करने के लिए रोडवेज कर्मचारियों (Haryana Roadways) द्वारा पीटे गए एक व्यक्ति को 20,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया और डीजीपी, हरियाणा को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया. आयोग ने कहा कि “यह एक ऐसा मामला है जहां एक अभिमानी सरकारी अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र को पार कर लिया है और मानवता के साथ काम नहीं किया है. उसने एक गुंडे की तरह काम किया और एक निर्दोष यात्री की पिटाई की ”. दरअसल एक शख्स पवन कुमार अपने भाई के साथ 6 सितंबर 2019 की रात को गुग्गा मंडी से हिसार के लिए बस में सवार हुआ था. कंडक्टर अनिल कुमार ने उससे पैसे लिए, लेकिन उसे टिकट नहीं दिया. पवन की जिद के बाद कंडक्टर ने उसे टिकट दे दिया.
बस के बोनट पर पटका सिर
इसके बाद बस में सवार एक वृद्ध ने कंडक्टर से अपना बैलेंस वापस करने के लिए कहा, लेकिन वह उससे बहस करने लगा. इस दौरान पवन कुमार ने घटना की रिकॉर्डिंग शुरू की. इसके बाद ड्राइवर ने बस को रोका और पवन का फोन छीन लिया, वीडियो डिलीट कर दिया और बस के बोनट पर उसका सिर फोड़ दिया.
रोडवेज के अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर की गई पिटाई
इस दौरान जब बाकि यात्रियों ने मामले में हस्तक्षेप किया और कंडक्टर और ड्राइवर से बस को पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा, तो वे उसे हिसार में एक कार्यशाला में ले गए, जहां रोडवेज के अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर पवन कुमार की पिटाई की गई. इसके बाद पीड़ित एक पुलिस स्टेशन गया लेकिन वहां कुछ नहीं हुआ. हैरानी की बात यह है कि कंडक्टर की शिकायत पर पवन पर मामला दर्ज किया गया था.
कंडक्टर की शिकायत थी झूठी
अब मामले में हिसार के एसपी (Hisar SP) ने एचएचआरसी को बताया कि यह पवन कुमार के खिलाफ एक झूठी प्राथमिकी थी और इसे 2 दिसंबर, 2019 को रद्द कर दिया गया था. वहीं अब मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने आदेश दिया कि कंडक्टर से 20,000 रुपये मुआवजा वसूल किया जा सकता है.

