नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों को लेकर चार्जशीट दायर की है जिसमें बस एक पक्ष के लोगों के नाम हैं. इसे लेकर पूर्व आईपीएस अफसर जूलियो रिबेरो ने फिर दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिठ्ठी लिखी है. उन्होंने अपनी चिठ्ठी में एक बार फिर दिल्ली दंगों में बीजेपी के उन नेताओं को दिए गए लाइसेंस पर सवाल उठाया है, जिनपर हिंसा के पहले भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे. जूलियो रिबेरो ने बुधवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव के ईमेल का जवाब दिया था. रिबेरो ने अपने पत्र में कहा कि उनके इस संदेह पर पुलिस कमिश्नर ने ध्यान नहीं दिया कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के सांप्रदायिक भाषणों की जांच की अनदेखी क्यों की जा रही है.
गुजरात, पंजाब के डीजीपी रहे और रोमानिया में भारत के पूर्व राजदूत रिबेरो ने कहा, मुझे लगता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण का इस्तेमाल वाले इन तीन बीजेपी नेताओं को इसके लिए दिए गए लाइसेंस को जायज ठहराना मुश्किल, असल में नामुमकिन है. अगर भड़काऊ भाषण देने वाले मुस्लिम अथवा फिर वामपंथी होते तो पुलिस उनपर देशद्रोह का चार्ज लगा देती.
समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक रिबेरो ने पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव से यह भी कहा कि उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद की देशभक्ति पर संदेह है. वे सचे राष्ट्रभक्त हैं. हर्ष मंदर और अपूर्वानंद गांधीवादी हैं. मुझे याद रखना चाहिए कि गांधीवादियों ने इस शासन के साथ अपना पक्ष खो दिया है.
बता दें कि जूलियो रिबेरो ने अपने पहले पत्र में कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा का नाम लिया था और पूछा था कि उन्हें पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया गया है. कपिल मिश्रा दंगों के पहले पुलिस वालों के साथ खड़े दिखाई दिए थे और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बात कही थी. वहीं परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर पर हेट स्पीच के आरोप हैं.
दिल्ली दंगा: जूलियो रिबेरो ने लिखी चिठ्ठी, बीजेपी नेताओं की जांच की अनदेखी क्यों?

