- मायके पहुंची बेटियों ने करू भात खाकर शुरू किया पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत, फुलेरा सजाकर आज करेंगी शिवलिंग की पूजा
छत्तीसगढ़ : मायके के लुगरा लगत है खास.. अखंड है बेटी के सुहाग.. छत्तीसगढ़ी संस्कृति और रीति रिवाजों की खुशबू लिए तीजा तिहार शुरू हो चुका है। मंगलवार को बहन बेटियों के आने से मायके का आंगन गुजलार हो उठा तो रात को करु भात की रस्म में सहेलियों का साथ पाकर महिलाओं के भी चेहरे खिल उठे। तीजा के एक दिन पहले किसी ने हाथों में मेंहदी रचाई तो किसी ने नई चूडिय़ां पहनी। बुधवार की आधी रात से सुहागिनें अपने पति के लिए 36 घंटे का कठिन तीजा का व्रत रखा और गुरुवार को मायके से मिले तीजा के लुगरा में दुल्हन की तरह सज-संवर कर महादेव और पार्वती की पूजा करेंगी।
दिनभर मेले सा माहौल
तीजा व्रत के शुरू होने से पहले करु भात की रस्म निभाने बेटियां मायके पहुंची। यंू तो बेटियों के आने का सिसलिसा पोला के दिन से शुुरू हो गया, पर कई घरों में बहन-बेटियां व्रत के दिन भी पहुंचेगी। इधर बस स्टैंड में तीजहारिनों की सुबह से भीड़ लगी रही। अपने बच्चों के संग वे मायके जाने घंटों बस का भी इंतजार करती नजर आई। सेक्टर 2 की रश्मि वर्मा ने बताया कि तीजा में जब तक बहन-बेटी को लेने ससुराल नहीं जाते तब तक वे मायके नहीं आती। इस रस्म के पीछे बेटी का सम्मान जुड़ा हुआ है, लेकिन अब दौड़भाग भरी लाइफ में फोन पर ही बुलावा आता है, और उसी बुलावे पर वे मायके दौड़ी चली जाती है। तीजा में मायके से भाई या पिता का बेटियों के ससुराल आना बेटी के लिए सम्मान की बात होती है। क्योंकि शादी के बाद बेटियां मायके बिना न्यौते के नहीं जाती। रिसाली की ज्योति चंद्राकर ने बताया कि जब राजा दक्ष ने यज्ञ कराया तो उन्होंने अपनी बेटी सती को न्यौता नहीं दिया था। तब मां सती जिद कर अपने मायके गई। पर महादेव ने उन्हें समझाया कि जब तक बुलावा ना आए वे वहां ना जाएं, पर वे चली गई। वहां जाकर जब अपने पति और अपना स्थान नहीं देखा तो उन्हें महादेव की बात याद आई । वे इस अपमान को सहन नहीं कर पाई और यज्ञकुंड में ही कूद गई। तब से यह परंपरा है कि तीज त्योहार हो या कोई खास दिन जब तक ससुराल में रहने वाली बेटियों को मायके से कोई बुलाने नहीं आता वे नहीं जाती।
रात में खाया करू भात, आज व्रत
तीन दिनों के इस उत्सव में बुधवार को को महिलाओं ने करेले की सब्जी और भात(चावल) खाकर करु भात खाया। लोक गायिका रजनी रजक ने बताया कि करेला खाने के बाद शरीर में पानी की कमी नहीं होती जिससे वे 36 घंटे का निर्जला व्रत आसानी से पूरा कर पाती हैं।
सजेगा आज फुलेरा
तीजा के दिन घर-घर फुलेरा सजेगा और महिलाएं मिलकर महादेव और पार्वती की पूजा करेंगी। हरितालिका तीज सुहागिनों के लिए सबसे बड़ा व्रत है। पौराणिक कथा के अनुसार इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शंकर को अपने पति के रूप में पाने के लिए किया था। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्मी माता पार्वती का विवाह उनके पिता ने भगवान विष्णु से तय किया था। जिसके बाद माता पार्वती की सखियां उनका हरण कर जंगल ले गई और उन्होंने वहां बालू की शिवलिंग बनाकर निर्जला व्रत रख कठिन तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर महादेव उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए।

