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पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी में सेना ने किया तख्तापलट, राष्ट्रपति अल्‍फा कोंडे को हिरासत में लिया, देश की सीमा बंद

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नई दिल्ली : द अफ्रीका के गिनी में भी अफगानिस्तान जैसे हालात हो गए हैं. यहां विद्रोही सैनिकों ने रविवार को राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को हिरासत में ले लिया. यहां राष्ट्रपति भवन के पास रविवार को कई घंटे तक फायरिंग चली. इसके बाद विद्रोही सैनिकों ने राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया और सरकारी टेलीविजन पर सरकार को भंग करने का ऐलान किया. कर्नल ममादी डोंबोया ने कहा ने टेलीविजन पर कहा, देश की सीमाओं को बंद कर दिया गया और इसके संविधान को अवैध घोषित कर दिया गया है. उन्होंने कहा, एक सैनिक का कर्तव्य देश की रक्षा करना होता है. उन्होंने कहा, हम अब राजनीति को एक आदमी को नहीं सौपेंगे. हम इसे लोगों को सौपेंगे.

कमांडर्स संभालेंगे सत्ता

वहीं, विद्रोही सेना ने ऐलान किया कि सोमवार को गिनी के सभी गवर्नर को क्षेत्रीय कमांडर्स से बदला जाएगा. साथ ही सेना ने ऐलान किया कि किसी भी इनकार को देश के सैन्य नेताओं के खिलाफ विद्रोह माना जाएगा. इकोनॉमिक कम्युनिटी ऑफ वेस्ट अफ्रीकन स्टेट्स (इसीओडब्ल्यूएएस) ने इस घटनाक्रम की निंदा की है. साथ ही कहा कि अगर कोंडे को जल्द रिहा नहीं किया, तो प्रतिबंध लगाए जाएंगे.

यूएन ने की आलोचना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ट्वीट किया, वे बंदूक के बल पर सरकार पर किसी भी अधिग्रहण की कड़ी निंदा करते हैं. अमेरिकी विदेश विभाग ने हिंसा के खिलाफ चेतावनी दी. साथ ही गिनी के प्रशासन से अतिरिक्त-संवैधानिक कार्यों से बचने की अपील की, जो गिनी की शांति, स्थिरता और समृद्धि के खिलाफ हैं.

हिरासत में राष्ट्रपति कोंडे

रविवार को राष्ट्रपति भवन के बाहर कई घंटों तक फायरिंग हुई. इस दौरान कोंडे लापता बताए जा रहे थे. हालांकि, बाद में एक वीडियो सामने आया, इसमें कोंडे सैन्य हिरासत में नजर आ रहे थे. सैन्य अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा, कोंडे अपने डॉक्टर्स के साथ संपर्क में थे. हालांकि, उनके रिहाई को लेकर कुछ नहीं कहा गया. सैन्य अधिकारियों ने कहा, समय आने पर सब कुछ ठीक हो जाएगा, हम बयान जारी करेंगे.

1 दशक से ज्यादा समय से सत्ता में थे कोंडे

कोंडे 1 दशक से ज्यादा समय से सत्ता में हैं. लेकिन पिछले साल तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है. इसके बाद से सेना में भी उनके खिलाफ असंतोष देखा गया. डोंबोया सेना की विशेष बल इकाई के कमांडर थे. उन्होंने सैनिकों से खुद को लोगों के पक्ष में रखने की अपील की. सेना के कर्नल ने कहा कि वे राष्ट्र के सर्वोत्तम हित में काम कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि 1958 में फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से नेताओं द्वारा आर्थिक प्रगति में हमेशा कमी रही.

‘हमें जागना होगा’

डोंबोया ने कहा, अगर आप हमारी सड़कों की स्थिति देखते हैं, आप हमारे अस्पतालों की स्थिति देखते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि 72 साल बाद जागने का समय आ गया है. हमें जागना होगा. हालांकि, जानकारों का मानना है कि गिनी के राष्ट्रपति और सेना के कर्नल के बीच तनाव सैन्य वेतन में कटौती के हालिया प्रस्ताव के बाद उभरा.

रविवार को घंटों हुई फायरिंग

रविवार की सुबह से ही राष्ट्रपति भवन के पास घंटों तक फायरिंग हुई. हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमले को विफल कर दिया गया. लेकिन जब सरकारी टेलीविजन या रेडियो पर कोंडे की तरफ से कोई संदेश नहीं आया तो अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई. बाद में पता चला कि कोंडे को हिरासत में ले लिया गया है.

2010 में पहले राष्ट्रपति चुने गए थे कोंडे

गिनी को 1958 में फ्रांस से आजादी मिली थी. लेकिन यहां 2010 में पहला लोकतांत्रिक चुनाव हुआ था. इसमें कोंडे पहले राष्ट्रपति चुने गए थे. कई लोगों ने उनके राष्ट्रपति बनने को देश के लिए एक नयी शुरुआत के तौर पर देखा था लेकिन उनके शासन पर भ्रष्टाचार, निरंकुशता के आरोप लगे. हालांकि, तीसरे कार्यकाल को लेकर उनकी आलोचना हो रही थी. कोंडे का कहना था कि उनके मामले में संवैधानिक अवधि की सीमाएं लागू नहीं होतीं. ऐसे में वे फिर से राष्ट्रपति बन गए. लेकिन उनके इस कदम के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन होने लगे.

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