प्रांतीय वॉच

हेण्डपम्प में क्लोरीन डालकर किया जा रहा शुद्धिकरण

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बालकृष्ण मिश्रा/सुकमा : वर्षा ऋतु में जल जनित बीमारियों से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के पेयजल स्त्रोतों का पीएचई विभाग द्वारा क्लोरीनेशन किया जा रहा है। बारिश के मौसम में वर्षा का दूषित जल पेयजल स्त्रोतों में मिल जाने से पीने योग्य पानी भी दूषित हो जाता है। जिसे पीने से बीमारियां होने का खतरा रहता है।
जल स्त्रोतों में बारिश का जल पहुंचने व जल भराव से प्रभावित गांवों में लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग द्वारा पेयजल स्त्रोतों में तरल क्लोरीन डालकर शु़िद्धकरण का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत् जिले में स्थापित हेण्डपम्प, जल टंकी, नलजल योजनाओं से होने वाली पेजयल स्त्रोतों में क्लोरीनेशन का कार्य सतत् रूप से किया जा रहा है। जिले में 6096 हेण्डपम्पों में से 3445 हेण्डपम्पों को क्लोरिनेशन किया जा चुका है।
गंदे पानी के नुकसान
शुद्ध पेयजल स्वास्थ्य का मूलाधार है। बचपन में अच्छे पोषण और विकास के लिए शुद्ध पेयजल बिलकुल जरूरी है। अतिसार, दस्त, पीलिया, पोलिओ आदि अनेक रोग अशुद्ध पेयजल से फैलते हैं। इन रोगों से सभी को नुकसान होता है लेकिन बच्चों का कुछ ज्यादा ही नुकसान होता है। शुद्ध पेयजल से यह सारा नुकसान हम टाल सकते हैं और दवाओं का खर्चा भी। बारिश में पानी को उबालकर पीने, एक दिन का बासा पेयजल पीने आदि की सलाह दी जा रही है।

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