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औषधीय गुणों से युक्त लाल, काला, हरा, जिंक राइस की खेती कर रहे युवा किसान

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  • इससे पहले भी कर चुके हैं 56 देशी किस्मों के धान की खेती

संजय महिलांग/नवागढ़/बेमेतरा : कृषि प्रधान जिला बेमेतरा के नवागढ़ तहसील मुख्यालय में इस वर्ष लाल,काला,हरा और जिंक किस्म की औषधीय गुणों से युक्त धान की जैविक पद्घति से खेती होने लगी है। युवा किसान किशोर राजपूत ने ब्लैक राइस की खेती की शुरूआत पिछले 3 साल पूर्व किये थे। हरे रंग की धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए समृद्धि स्वदेशी बीज बैंक नवागढ़ द्वारा बीज संरक्षण संवर्धन के लिए नवीन बीज तैयार कर रहा है।

लाल, काला, हरा और जिंक किस्म

औषधीय गुणों से युक्त देशी किस्मों के इस धान की खेती से बेमेतरा जिले के अधिकांश किसान वाकिफ नहीं है। 90 फीसदी से अधिक किसानों ने ऐसा धान न सुना है न देखा है। इस क्वालिटी की चावल सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। महंगा दाम सुनने के बाद भी कई किसान इस औषधीययुक्त चावल की खेती करना पसंद करेंगे नगर पंचायत नवागढ़ में काला और लाल औषधीय चावल खेती की शुरुआत हो चुकी है।

समृद्धि स्वदेशी बीज बैंक में संचालित बीज संवर्धन योजना के परियोजना

युवा किसान किशोर राजपूत ने बताया कि ब्लैक राइस की खेती तहसील के सिर्फ नवागढ़ में बीज सुधार कार्यक्रम के तहत शुरू की गई है। विगत 3 साल पहले युवा किसान ने बस्तर से प्रति किलो 500 रुपए में बीज मंगाकर इसकी शुरुआत की है।ब्लैक 35 एकड़ व लाल राइस की खेती खरीफ वर्ष 2021 में 10 डिसमिल में लगाया गया।किशोर राजपूत ने बताया कि गौवंश आधारित प्राकृतिक खेती से प्रति एकड़ उत्पादन 13 से 14 क्विंटल प्राप्त हुआ।

हरे चावल खेती की शुरुआत करने पहल हो चुकी है।

युवा प्रगतिशील किसान किशोर राजपूत ने समृद्धि स्वदेशी बीज बैंक के द्वारा संचालित प्राकृतिक खेती शोध संस्थान के बीज बैंक में हरे चावल का बीज तैयार करने के लिए 1 डिसमिल में नर्सरी लगाए गए हैं। इस वर्ष 2021 से नवागढ़ में इसकी खेती की जाएगी। नवागढ़ में खरीफ सीजन में 20 डिसमिल में जिंक चावल की खेती की जाएगी । लाल व हरे चावल के बीज को बस्तर के दंतेवाड़ा से मंगाया गया है।

कई बीमारियों के लिए फायदेमंद हैं इनके औषधीय गुणों से युक्त चावल

युवा किसान किशोर राजपूत ने बताया कि वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लैक राइस (करघनी) देशी प्रजाति के औषधीय धान के बीज है। इसमें कैंसर प्रतिरोधी मिनरल्स खनिज, एंथ्रोसाइनीन नामक वर्णक, फास्फोरस, कैल्शियम खनिज, एंटीआक्सीडेंट, एंटीएजेंट,जिंक पाए जाते है। इस चावल को खाने से कैंसर की बीमारी नहीं होती।शुगर, बीपी, हृदय से संबंधित बीमारियां नहीं होती। शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। लाल चावल (दांवर एवं साटका) देशी प्रजाति में आयरन, फोलिक एसीड,जिंक तत्व पाया जाता है। यह चावल एनीमिया, सिकलिन, गर्भवती महिलाओं, कुपोषण मुक्ति के लिए लाभदायक है। जिंक चावल में सामान्य चावल से 15 से 20 प्रतिशत अधिक जिंक पाया जाता है। शुद्घ जैविक पद्घति से उत्पादित इस धान की डिमांड मेट्रो सिटी दिल्ली, मुंबई और बैंग्लुरू में अधिक है।

ओपन मिनी बाजार में मिलेगा चावल

नवागढ़ में औषधीय लाल व काला चावल खेती की शुरुआत हो चुकी है। पिछले साल उत्पादन भी अच्छा हुआ है। लेकिन शासन की ओर से औषधिय चावल खरीदने कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में थोड़ी दिक्कत जरूर हो रही है। जैविक पद्धति से उत्पन्न इन सभी किस्मों के चावल की बिक्री जल्द ही नगर के कुछ दुकानों में शुरू होगा। औषधीय गुण युक्त चावल का दाम काफी महंगा होता है। इसलिए औषधीय चावल की खेती करने वाले किसानों को लाखों में फायदा होता है।

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