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भिलाई निगम के नए अपर आयुक्त ने किया शहरी गोठान का निरीक्षण

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  • वर्मी कंपोस्ट से खाद बनाने तथा मवेशियों के देखरेख की जानकारी लिए

तापस सन्याल/भिलाईनगर : नगर पालिक निगम, भिलाई द्वारा संचालित शहरी गोठान का भिलाई निगम के नवनियुक्त अपर आयुक्त ने निरीक्षण किया। गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी, वर्मी कंपोष्ट शेड एवं केचुआं पालन तथा मवेशियों के देखभाल का अवलोकन किया। गोठान संचालन करने वाली महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि गोपालकों से खरीदे गए गोबर को रोस्टर सिस्टम से कंपोष्ट पीट में डाला जाता है, उन्होंने बताया कि गोबर से अन्य उत्पाद भी बनाया जा चुका है, समूह की महिलाएं गोठान के रिक्त भूमि में सब्जियों की खेती भी करते है।

भिलाई नगर रेलवे स्टेशन स्थित शहरी गोठान का निरीक्षण भिलाई निगम के नए अपर आयुक्त पंकज शर्मा ने किया इस दौरान जोन 01 आयुक्त सुनील अग्रहरि भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वर्मी कंपोष्ट शेड, पीट से निकलने के बाद खाद बनाने की प्रक्रिया और गोठान के मवेशियों रहने, चारा पानी की व्यवस्था की जानकारी संचालन समिति के सदस्यों से लिये। अपर आयुक्त ने कहा कि गोधन न्याय योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजना है जिसका बेहतर तरीके से क्रियान्वयन करना है उन्होंने महिला स्व. सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा कर केन्द्रों में वर्मी खाद निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

इस दौरान समूह की महिलाओं ने गोठान संचालन के पंजी का भी अवलोकन कराते हुए अब तक खरीदे गए गोबर, विक्रय किये गये वर्मी खाद, गोबर से दीया, गमला, मूर्ति जैसे बनाए हुए अन्य उत्पाद की जानकारी दिये। गोठान संचालन करने वाली नई उड़ान समिति की महिलाओं ने बताया कि यहां की महिलाएं गोठान में सब्जी की खेती भी करती है, सब्जियों को स्थानीय बाजार में विक्रय कर स्व. सहायता समूह आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रही है। गोधन न्याय योजना के सफलतम क्रियान्वयन के लिये निगम आयुक्त श्री ऋतुराज रघुवंशी ने लगातार गोधन केन्द्रों का निरीक्षण कर महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनके परिणाम स्वरूप महिलाये आत्मनिर्भर बन रही है।

गौरतबल है कि शहरी गोठान में रहने वाले सभी मवेशियों के स्वास्थ्य की जांच समय समय पशु चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों द्वारा किया जाता है, इनके रहने के लिए सामाजिक सहभागिता से दो स्थानों पर शेड भी बनाया गया है जिससे मवेशियों को धूप और बारिश से बचाया जा सके। सभी मवेशियों को चारा पानी देने के लिए कोटना का निर्माण भी किया गया है। समय अनुसार मवेशियों को पैरा कुट्टी के अलावा हरा चारा भी उपलब्ध कराया जाता है जिससे इनका स्वास्थ्य ठीक रहे।

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