प्रांतीय वॉच

जानिए सी-60 कमांडो क्यों है चर्चा में, जिनसे नक्सली खाते हैं खौफ

Share this

रायपुर/बीजापुर/गढ़चिरौली। महाराष्ट्र की सी-60 कमांडो ने आज गढ़चिरौली के एटापल्ली जंगल में बड़ी कार्रवाई की है. मुठभेड़ में 13 नक्सलियों को ढेर कर दिया है. इसमें और नक्सली मारे जाने का दावा किया गया है. पूरे इलाके की सर्चिंग की जा रही है. जानकारी के मुताबिक, मारे गए 13 नक्सली के शव मौके से बरामद कर लिये गए हैं. नक्सलियों पर सफल कार्रवाई के बाद सी-60 कमांडो की खूब चर्चा हो रही है.दरअसल, सी-60 फोर्स एक ऐसे कमांडो की टीम है, जिन्हें खासकर नक्सली प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन करने के लिए तैयार किया गया है. इन्हें लोकल परिस्थितियों के अनुसार ही ट्रेनिंग दी गई है.

1992 में हुआ गठन
सी-60 कमांडो का गठन नक्सली हमलों को रोकने के लिए साल 1992 में गठन किया गया था. इस टीम में उस वक्त 60 पुलिसकर्मी शामिल किए गए थे. इसलिए इसे सी-60 कमांडो कहा था. इसका गठन गढ़चिरौली के तत्कालीन एसपी केपी रघुवंशी ने किया था. इसमें शामिल किये गए जवानों को हैदराबाद, बिहार, नागपुर के ट्रेनिंग कैंपों में गुरिल्ला युद्ध ट्रेनिंग दी गई थी.

स्थानीय लोगों को किया गया शामिल 

फोर्स में गढ़चिरौली के स्थानीय लोगों को ही शामिल किया गया था. फोर्स में शामिल होने की चाह रखनेवाले आदिवासी को कई टेस्ट से होकर गुजरना पड़ा, जिसमें उसका मानसिक और शारीरिक बल आदि देखा गया. इन लोगों को इलाके, भाषा, जलवायु आदि की समझ होने की वजह से वे नक्सलियों से मुकाबले में कारगर साबित हुए थे. यह इकलौती ऐसी फोर्स बताई जाती है जिसमें टीम को उसके कमांडर के नाम से जाना जाता है. ऐसी ही कुछ अन्य फोर्स भी देश में है. इसमें तेलंगाना की ग्रेहाउंड्स और आंध्र प्रदेश की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) शामिल हैं.

आदर्श वाक्य ‘विर भोग्या वसुंधरा’ 

सी-60 कमांडो का आदर्श वाक्य ‘विर भोग्या वसुंधरा’ है, जिसका मतलब है कि बहादुर ही दुनिया पर राज करते हैं. ये कमांडो खास तरीके से तैयार होते हैं और नक्सलियों के गढ़ में शामिल होकर ऑपरेशन को अंजाम देते हैं. वे सीआरपीएफ की कोबरा विंग आदि के साथ नक्सली इलाकों में काम करते हैं. सी-60 के जवान अपने साथ करीब 15 किलो का भार लेकर चलते हैं. जिसमें हथियार के अलावा, खाना, पानी, फर्स्ट ऐड और बाकी सामान शामिल होता है.

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *