महेन्द सिंह/पांडुका/नवापारा/राजिम/रायपुर : विश्व परिवार दिवस प्रतिवर्ष 15 मई को परिवार की अनिवार्यता सामाजिक गठबंधन के सशक्तिकरण जिससे प्रदेश से देश और विश्व की पहचान बनती है जिस देश में परिवार में एकता और मेहनत करने का जज्बा है मुसीबतों से लड़ने का हौसला है वह परिवार ही नहीं वह कौम ही नहीं पूरा देश खुशहाल होता है। आज छत्तीसगढ़ वाच ब्यूरो चीफ महेंद्र सिंह ठाकुर संघर्ष से भरी बेहद प्रेरणादाई खारी परिवार की गौरवमई दस्तान जिसकी शुरुआत स्वतंत्रता से पूर्व पूर्वजों के बलिदान से होती है लेकर आए हैं वर्तमान में इस परिवार की शान,,7 सुपर स्टार्स अर्थात सात बहने हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन में दादा जी को काले पानी की सजा हुई थी, रायपुर छत्तीसगढ़ के अमलेश्वर रोड स्थित दुर्गा नगर में खारी दंपत्ति जिसमें पति जितेन्द्र सिंह खारी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरस्वती खारी अपने सात बेटियों के साथ निवास करते हैं सब एक से बढ़कर एक हुनरमंद और रोज संघर्षों से लड़कर नारी शक्ति के गौरव का प्रतीक और सफलता का परचम लहराए हुए हैं, इस परिवार की प्रेरणादायक संघर्ष और करुणा से भरी दास्तान के लिए हम इस परिवार की पृष्ठभूमि में चलते हैं जितेंद्र सिंह खारी मूलतः ग्राम शेरपुर जिला बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं जहां आज भी उनके सगे संबंधी और भरा पूरा परिवार है। जितेंद्र सिंह खारी ने छत्तीसगढ़ वाच ब्यूरो से बात करते हुए बताया इनके दादा स्वर्गीय श्री शीशपाल सिंह खारी स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे छोटी मोटी सजाएं और यातनाएं अंग्रेजी शासन इनको देती रहती थी अंग्रेजी हुकूमत की कई चेतावनी के बाद इनके दादा नहीं माने तो अंग्रेजी हुकूमत ने इनके दादा को सीधा काले पानी की सजा में अंडमान निकोबार में भेज दिया जो मौत से भी ज्यादा भयानक सजा थी यह सन1920 के समय की बात थी। जिससे इनके परिवार में कठिन संघर्ष का दौर आ गया और इनका परिवार पलायन करने लगा जितेंद्र सिंह के पिता स्वर्गीय श्री चंद्र सिंह खारी परिवार सहित रायपुर छत्तीसगढ़ आ गए और छोटा मोटा कार्य तथा ट्रांसपोर्ट के कार्य की ओर कदम बढ़ाया यहां यह बता देना आवश्यक है कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में ऐसे सैकड़ों गुमनाम परिवार हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व देश की आजादी की लड़ाई के लिए अर्पण कर दिया बदले में कभी कुछ नहीं चाहा बल्कि जो अंग्रेजों के साथ थे समझौता कर के चलते थे उन्हें ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की भरपूर मलाई मिली कुछ अप वादों को छोड़ दें अगर आप वीर क्रांतिकारियों के परिवार की संघर्ष और करुणा भरी दास्तान जानेंगे इनके सजायाफ्ता होने या फासी में चढ़ने के बाद तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। जितेंद्र सिंह भी जब होश संभाले तो पिता के कार्य में लग गए खुद्दारी से हमेशा काम किया तो करोड़ों तो नहीं कमाए लेकिन परिवार में खुशहाली और संपन्नता है और इसकी सबसे बड़ी वजह इनकी अद्भुत सेवन सुपर स्टार्स बेटियां हैं जो आज बेटों से ज्यादा बढ़ चढ़कर काम कर रही हैं। जितेंद्र सिंह खारी के पास जेसीबी हाईवा ट्रैक्टर बगैरा है बड़ी बेटी काजल सिह खारी उम्र 21 वर्ष एवं सबसे छोटी बेटी रिया सिह खारी उम्र 15 वर्षउनके कारोबार में हाथ बटाती हैं जिसमें बड़ी बेटी काजल सिह खारी जब हाईवा ट्रैक्टर में मटेरियल लोड कर एक मंझे हुए ड्राइवर की तरह ड्राइव करते हुए निकलती हैं तो लोग मोबाइल देखते रहते हैं और इनके सहायिका के रूप में छोटी बहन रिया खारी हमेशा साथ में रहती हैं और यह भी अपनी दीदी की तरह इन वाहनों को चलाना सीख कर पापा की मदद करना चाहती है। काजल सिंह खारी जब जेसीबी से राह मटेरियल हाईवा और ट्रैक्टर में लोड करती हैं और खुदाई करती हैं जुनून में सब कुछ भूल जाती हैं तयशुदा काम चाहे जितना समय लगे उसे समय से पूर्व करना इनकी फितरत है जिससे इनके पास काम की कमी नहीं रहती पुरुष के एकाधिकार समझे जाने वाले क्षेत्र में नारी शक्ति का जबरदस्त प्रहारहै। इनकी इच्छा अब चैन माउंटेन जैसी भारी भरकम मशीन और दुनिया की हेवी व्हीकल मैं एक्सपर्ट बनने का सपना है जिसे शीघ्र पूरा कर लेंगी।
सभी बहने कठोर मेहनत करने में जुनूनी साथ में पढ़ाई में भी होशियार,,,, यह सभी सात बहने जिनमें प्रथम तीन बहने काजल काजल सिंह खुशी सिंह और कुमकुम सिंह बी कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा है पायल सिंह बारहवीं की इनके बाद पलक सिंह और चारूसिंह कक्षा ग्यारवी और सबसे छोटी रिया सिंह कक्षा आठवीं की छात्रा है जिनमें सबसे बड़ी काजल सिंह और सबसे छोटी रियासिंह अपने पापा के कार्यों को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का सपना संजोकर रखे हैं वही खुशी सिंह डांसिंग स्टार हैं डांस सिखाने के साथ ट्रेडिंग और ऑनलाइन बिजनेस में अभी से एक्सपर्ट हो चुकी है कुमकुम सिंह मेकअप आर्टिस्टबनना चाहती हैं। पायल सिंहआईपीएस बनना चाहती हैं पलक सिंह कुकिंग एक्सपर्ट और कॉमेडी किंग हैं इनके बाद चारू सिंह भी कला के क्षेत्र में जाना चाहती हैं। यह सब बहने इतनी मेहनती हैं कि इनके ट्रांसपोर्ट के कार्य में अगर लेबर कोताही करते हैं और नहीं आते हैं तो सभी बहनें मिलकर लिए हुए काम को चाहे जितना कठिन हो मिलकर निपटा देते हैं जब छत्तीसगढ़ वॉच ब्यूरो प्रमुख सबसे बड़ी बहन काजल सिंह खारी से मोबाइल से बात कर रहे थे उस समय काजल सिंह अपने ट्रैक्टर में सभी बहनों को लेकर लेबर लोगों के ना आने से ईटा लोड कर ईट भट्टी से ऑर्डर की जगह में उतार रही थी और उसके बाद हाईवा के इंजन ऑयल बदलना और चक्को तथा अन्य पार्ट में ग्रिसिंग जैसे कठिन कार्य को अंजाम देना था, तथा समाचार में पूरे परिवार के साथ जो फोटो लगी है वह इस कर्मठ के कार्य के बाद पूरे परिवार के साथ खींच कर छत्तीसगढ़ वॉच ब्यूरो प्रमुख के अनुरोध के बाद भेजी गई है। ऐसे प्रेरणादाई परिवार के मुखिया जितेंद्र सिंह और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरस्वती सिंह इससे से छत्तीसगढ़ वाचब्यूरो प्रमुख ने जब पूछा इन के पालन पोषण में बेहद तकलीफ गई होगी तो बच्चियों की माता ने कहा मैंने बचपन से ही स्वावलंबन जी भर कर इनको सिखाया और ये छोटी उम्र से ही मेहनत और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा दिए थे ईश्वर की कृपा है ऐसी बेटियों सबको मिले हम बहुत खुश और प्रसन्न हैं। यह पूरे प्रदेश औरदेशवासियों के लिए बिल्कुल शाश्वत अलग नारा है,,, बेटियां आगे बढ़ेंगी,,, देश तेजी से आगे बढ़ेगा।
विश्व परिवार दिवस : संघर्ष का पर्याय खारी परिवार, 7 सुपर स्टार्स, सात सगी बहनों से खुशहाल इनका घर संसार

