टीकम निषाद/देवभोग : कोरोना की आड़ में इन दिनों पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्य स्थल से साइड इंजीनियर गायब दिखाई पड़ रहे हैं। जिसका फायदा उठाते हुए निर्माण एजेंसी द्वारा जमकर कार्य में भरराशाही को अंजाम दिया जा रहा है। ऐसा ही ग्राम पंचायत कुहीमाल में देखने को मिला है। जहां मनरेगा के तहत लाखों की लागत से चेक डैम निर्माण किया जा रहा है। और इस कार्य में गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर जिम्मेदार सरपंच सचिव मुनाफा कमाने में लगे हुए हैं। तभी क्वालिटी हिन मटेरियल इस्तेमाल लाया जा रहा है ।पंचायत ग्रामीण विकास विभाग मापदंड के विपरीत चेक डैम निर्माण से ग्रामीण भी नाराज है। लेकिन इंजीनियर एसडीओ की मौजूदगी नहीं होने के चलते अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। क्योंकि सरपंच सचिव द्वारा हाथ फोड़ एवं क्रेशर गिट्टी को एक साथ मिलाकर हल्की सीमेंट के साथ रेती से मसाला बनाकर चेक डैम निर्माण कर रहे हैं। इससे पानी की तेज बहाव होने पर धरा शाही होने की पूरी संभावना जताई जाती हैं। क्योंकी चेक डैम निर्माण ना गहराई का ख्याल रखा गया। और ना क्वालिटी दार मटेरियल का इस्तेमाल हो रहा ।इसके अलावा मटेरियल की मजबूती के लिए जरूरी मशीन का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है ।जिसके चलते चेक डैम में इस्तेमाल सीमेंट अब धूल में तब्दील हो रही है। जिसका मुख्य कारण पानी की तरह मैं कोताही को भी माना जाता है। ऐसे में यह देख चेक डैम का टिकना भी मुश्किल बताते हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुही माल से छैला कच्ची सड़क के बीच ग्रामीणों की मांग पर चेक डैम स्वीकृत किया गया। लेकिन निर्माण एजेंसी ने लॉकडाउन से पहले कार्य को लेकर गंभीरता नहीं दिखाया और जब एसडीओ इंजीनियर सीईओ कार्यस्थल नहीं पहुंच सकते ऐसे समय का फायदा उठाकर गुणवत्ताहीन मटेरियल से जैसे तैसे चेक डैम निर्माण करा रहे हैं ।चेक डैम में इस्तेमाल मटेरियल को देख आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है ।बरसात के बीच तक यह चेक डैम टिकना मुश्किल है। और इससे पंचायत के जिम्मेदार भी लगभग अवगत हैं। लेकिन कम लागत में चेक डैम निर्माण कर अधिक मुनाफा कमाने के लिए मापदंड को पूरी तरह अनदेखा कर रहे हैं ।
नरसिंह ध्रुव सीईओ : अगर मापदंड के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है तो जांच कराया जाएगा उसके बाद राशि कटौती की कार्यवाही भी किया जाएगा l

