प्रांतीय वॉच

किशोर ने विकसित की अरहर की उन्नत किस्म ”समृद्धि गोल्ड”

Share this

संजय महिलांग/नवागढ :  दाल के संकट से जूझ रहे देश के लिए अरहर की नई प्रजाति वरदान साबित होगी। अब तक की अरहर की प्रजातियों की तुलना में करीब दो गुना अधिक पैदावार देने वाली किस्म ‘समृद्धि गोल्ड’ तैयार की गई है। बेमेतरा के नवागढ़ गांव के प्रगतिशील युवा किसान किशोर राजपूत ने वर्षों के प्रयास के बाद इसका विकास छत्तीसगढ़ राज्य के पुरानी देशी कृषि बीज द्वारा विकसित की गई प्रजाति से किया है। एक एकड़ में जहां अब तक सात-आठ कुंतल अरहर की पैदावार होती थी, वहीं अब ‘समृद्धि गोल्ड’ प्रजाति से किसान इतने ही क्षेत्रफल में 10-12 क्यूंटल उपज हासिल कर सकेंगे।

किशोर राजपूत ने इस नई प्रजाति को विकसित करने में सफलता पाई है। दो साल से प्रायोगिक तौर पर इसकी खेती नवागढ़ में की गई उत्साहजनक परिणाम आने के बाद इस साल ‘समृद्धि गोल्ड’ की खेती नवागढ़ के अलावा क्षेत्र के कुछ अन्य किसानों ने भी करने की इच्छा जाहिर किया है। बीजों के विकास पर काम करने वाले किशोर राजपुत इस नई प्रजाति को लेकर बेहद उत्साहित हैं। समृद्धि गोल्ड का पौधा अन्य प्रजातियों की तुलना में दो फीट तक छोटा हो गया है। करीब पांच फुट तक के पौधे में 20-25 शाखाएं निकलकर झाड़ी के आकार में फैल रही हैं। इसके दाने भी दूसरी प्रजाति की अरहर की तुलना में दो गुना बड़े पाए गए हैं।

किशोर राजपूत ने अरहर की इस प्रजाति के विकास को किसानों के लिए वरदान बताया। उन्होंने बताया कि समृद्धि गोल्ड प्रजाति से अरहर की उपज में दो गुना की वृद्धि होने की उम्मीद है। एक एकड़ में समृद्धि गोल्ड की खेती कर किसान 10 कुंतल अरहर पैदा कर सकेंगे। जबकि अभी तक इतने खेत में औसतन सात कुंतल तक ही पैदावार मिलती रही है। काली, दोमट मिट्टी के इलाके वाले किसानों के लिए अरहर की इस प्रजाति की खेती ज्यादा फायदेमंद रहेगी।

समृद्धि गोल्ड प्रजाति की अरहर आकार में छोटे और अधिक फलियों वाले पौधे के दाने अब तक की अरहर की प्रजातियों से दो गुना अधिक बड़े मिले हैं इस फसल से तैयार होने के बाद समृद्धि गोल्ड के बीज का भंडारण किया गया है ताकि अगले वर्ष इसे अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाकर अरहर के उत्पादन को बढ़ाया जा सके।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *