टीकम निषाद/देवभोग : राज्य सरकार के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी लगातार पंचायत के जिम्मेदारों को रोजगार मूलक कार्य कराने के लिए निर्देश दिया जा रहा है। ताकि गरीब तबके के मजदूरों को इस विकराल स्थिति में रोजगार मिले और घरों का चूल्हा जल पाए। लेकिन नयापारा पंचायत के सरपंच सचिव की उदासीनता के चलते सीसी सड़क के कार्यों को रोक दिया गया है जिसके चलते धुर्वापाथर के मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे में मजदूरों के घर का चूल्हा जलना भी मुश्किल है। सबसे दयनीय स्थिति तो असहाय लोगों कि देखने को मिलता है। जानकारी अनुसार नयापारा पंचायत के आश्रित ग्राम धुर्वा पाथर 14वें वित्त के तहत 200000 से अधिक राशि से सड़क निर्माण के लिए मटेरियल गिराया गया है। लेकिन पिछले 20 दिन से काम बंद कर रखा हैं। और मजदूरों द्वारा सड़क निर्माण शुरू करने के सवाल पूछने पर लॉकडाउन का हवाला देकर सचिव एवं सरपंच अपना अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि मनरेगा के तहत भी निर्धारित दिवस अनुसार रोजगार नहीं दिया गया ऐसे में घर पर बैठकर परिवार का पेट किस तरह भरा जा सकता है। जिसकी परवाह ना सचिव को है ।और ना जिम्मेदार अधिकारियों को मतलब पंचायत के जिम्मेदार अपने लाभकारी कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करते हैं ।लेकिन जहां मजदूरों की बात होती है। तो सरपंच सचिव अपने हाथ खड़े कर देते हैं ।यही वजह है कि इस पंचायत के अधिकांश मजदूर मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। क्योंकि अधिकांश मजदूर रोज की मजदूरी के भरोसे ही परिवार का भरण पोषण करते हैं ।तभी किसानों के समक्ष पहुंचकर मेड़बंदी समतलीकरण जैसे अन्य कार्यों की स्वीकृति के लिए कहा जाता है ।क्योंकि जिनकी मनरेगा के तहत कार्य स्वीकृत हुई है ।वह कार्य कराने के लिए इच्छुक दिखाई नहीं पड़ते ।जिससे ना सचिव वास्ता रखते हैं और ना मनरेगा के जिम्मेदार अधिकारी कोई खबर होती है। ऐसे में प्रगति कार्य को रोकना पंचायत कर्मी पर सवाल खड़ा करता है। उनकी अधिकारियों के रोजगार देने के आदेश का खुलेआम माखौल उड़ाया जा रहा है ।
भोज नाथ भाटी सचिव ग्राम पंचायत नयापारा : लॉकडाउन है तभी हमने सड़क निर्माण नहीं कराया और हमें किसी ने कराने के लिए नहीं कहा है ।

