र्कवर्धा जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर इन दिनों एक गंभीर सवाल चर्चा में है—क्या जिले में ऐसे शिक्षक भी हैं, जो लंबे समय से स्कूल नहीं जा रहे, लेकिन उनकी तनख्वाह हर महीने नियमित रूप से खाते में पहुंच रही है
अगर यह शिकायत सही है तो मामला केवल स्कूल से अनुपस्थित रहने का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और सरकारी खजाने के साथ जवाबदेही का भी है।
बताया जा रहा है कि जिले के चारों विकासखंडों में ऐसे शिक्षकों की संख्या सामने आ सकती है, जो लंबे समय से नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद वेतन भुगतान लगातार जारी है। सवाल यह है कि आखिर विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी कौन कर रहा है
DEO से लेकर ब्लॉक स्तर तक निगरानी पर सवाल
यदि कोई शिक्षक महीनों या वर्षों तक विद्यालय नहीं जाता, तो उसकी अनुपस्थिति की जानकारी स्कूल से ब्लॉक और जिला स्तर तक क्यों नहीं पहुंचती
और यदि जानकारी पहुंचती है, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती
क्या विभाग के पास शिक्षकों की उपस्थिति, वेतन भुगतान और विद्यालय में वास्तविक मौजूदगी की जांच करने की व्यवस्था नहीं है? या फिर व्यवस्था होने के बावजूद उसकी निगरानी में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है
चारों ब्लॉकों में हो अचानक जांच
इस मामले में कागजी खानापूर्ति के बजाय अचानक निरीक्षण की जरूरत है। चारों ब्लॉकों के विद्यालयों में पिछले वर्षों की उपस्थिति पंजिका, ऑनलाइन अटेंडेंस, वेतन भुगतान रिकॉर्ड और अधिकारियों के निरीक्षण प्रतिवेदनों का मिलान कराया जाए।
यदि कोई शिक्षक लंबे समय से विद्यालय से अनुपस्थित पाया जाता है, तो यह भी जांच होनी चाहिए कि उस अवधि का वेतन किस आधार पर जारी हुआ और किस स्तर पर उसका सत्यापन किया गया।
बच्चों की पढ़ाई से बड़ा कोई मुद्दा नहीं
सरकारी शिक्षक को मिलने वाला वेतन जनता के टैक्स से जाता है। बदले में सरकार और समाज की अपेक्षा होती है कि शिक्षक विद्यालय पहुंचे, बच्चों को पढ़ाए और अपनी जिम्मेदारी निभाए।
अगर कोई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाए बिना सरकारी वेतन प्राप्त कर रहा है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
अब सवाल जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित ब्लॉक अधिकारियों से है
क्या जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति की निष्पक्ष जांच होगी
क्यों न चारों ब्लॉकों में एक विशेष टीम बनाकर औचक निरीक्षण कराया जाए
क्यों न लंबे समय से अनुपस्थित शिक्षकों की सूची सार्वजनिक की जाए
और यदि शिकायत सही मिलती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए
क्योंकि बच्चों का भविष्य किसी की लापरवाही की कीमत पर दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
☕ अब चाय की प्याली में सवाल गर्म है
शिक्षक स्कूल में हैं या सिर्फ उनकी तनख्वाह स्कूल पहुंच रही है
चाय पर चर्चा दीपक तिवारी

