- वनवासियों के आजीविका का मुख्य स्रोत महुआ बीनने ग्रामीण मशगूल
पुलस्त शर्मा/ मैनपुर : विकासखंड मुख्यालय मैनपुर के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों दो-चार दिन ही हुआ है ग्रामीण पूरे परिवार के साथ जंगलों एवं खेत खलिहानो टिकरा टोला में पीला सोना महुआ बीनने में मशगूल है। अल सुबह ही हाथ में टोकनी लिए अलग अलग डगर से होते हुए संघन जंगलो व पहाडियों की ओर लघु वनोपज संग्रहण के लिए निकल पडते है इस वनांचल क्षेत्र के महिलाए बच्चे युवा और बुजूर्ग यह खुसनुमा मंजर इन दिनों दिखाई दे रहा है, ग्रामीण क्षेत्रो में महुआ संग्रहण करने ग्रामीण अल सुबह ही निकल पड़ते है जो दोपहर तक वापस लौटते हुए महुआ को सुखा कर इकट्ठा कर रहे हैं। जंगल क्षेत्र के आसपास के गांवों के रहवासियों को गांव में कम इन दिनों टिकरा टोला में अधिक देखा जा सकता है जिसके कारण गांव सुनसान नजर आने लगा है । महुआ के शुरुआती सीजन होने के कारण ग्रामीण परिवार बहुत कम मात्रा में महुआ को घर ला रहे हैं धीरे-धीरे महुआ की आवक बढ़ेगी फिलहाल ग्रामीण परिवार गांव में कम जंगलों में ज्यादा नजर आएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासी अपने पूरे परिवार के साथ महुआ बीन रहे हैं। परिवार के बड़े, बूढे, बच्चे, महिलाए और किशोर सभी महुआ बीनने में व्यस्त हैं। जंगल में चारों तरफ पीला सोना महुआ की सौंधी सौंधी खुशबू आने लगी है हालांकि महुआ इस समय कम गिर रहा है। इस बीच अलग-अलग गांव के लोगों के बीच आपसी रिश्ता भी गहराता है। जंगल क्षेत्रों के ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष के 3 महीना परिवार चलाने के लिए महुआ मुख्य स्रोत होने के साथ ही ग्रामीण परिवार सीजन मे 10 से 15000 रूपयें तक कमा लेते हैं। मौसम अनुकूल रहा तो इस बार महुआ के आवक अच्छा होने का भी संभावना ग्रामीणों के द्वारा जताया गया। फिलहाल नया महुआ बाजार में नहीं आया है। आने से 25 से 30 रूपयें किलो में बिकने की संभावना क्षेत्रीय व्यापारियों के द्वारा किया जा रहा है। महुआ बीनने के लिए ग्रामीण जंगलो में लगा देते है। जिनसे मासूम पेड़ पौधे जलने के साथ ही जंगली जानवरों का क्षेत्र के जंगल से भागने की संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग के द्वारा जंगलों में आग नहीं लगाने के लिए ग्रामीणों को समझाइश भी दे रहे है।

