- लोक कला मंच धरोहर ने मुख्य मंच में दी प्रस्तुति
राजिम। आज के युवा रातों-रात कामयाबी चाहते हैं, जबकि सच्चाई ये है कि बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता। युवा चाहे वे जिस क्षेत्र में करियर बनाना चाहें, लगातार अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। यह कहना है धरोहर लोक कला मंच संस्थापक महादेव हिरवानी का। राजिम में चल रहे माघी पुन्नी मेले की तीसरी शाम धरोहर के नाम रही। हिरवानी ने मीडिया सेंटर में लोक कलामंच से जुड़ी बातें साझा की।
इसलिए रखा धरोहर नाम
हम कलाकारों का दायित्व मनोरंजन के अलावा हमारी बोली-भाषा और संस्कृति को भावी पीढ़ी को हस्तांतरित करना भी है। नई पीढ़ी भी इसे आगे बढ़ाए और सहेज कर रखे। यही सोचकर हमने लोक कला मंच का नाम धरोहर रखा।
आज के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं, लेकिन अश्लीलता से बचें
सोशल मीडिया के दौर में हर किसी को प्लेटफॉर्म उपलब्ध है। इसमें कोई शक नहीं कि हमारे युवा प्रतिभा से परिपूर्ण हैं, लेकिन ऐसा कोई प्रयोग न करें जिससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर प्रहार हो। गीतों में अश्लीलता हावी न होने दें।
लक्ष्मण मस्तुरिया, मिथिलेश साहू हैं आदर्श
माघी पुन्नी मेले में पहली बार आने का सौभाग्य मिला है। दर्शकों ने खूब प्यार दिया। राजनांदगांव से शुरू हुआ सफर 10 साल पूरे कर चुका है। अब तक दिल्ली और भोपाल समेत कई शहरों में प्रस्तुति दे चुके हैं। श्री हिरवानी ने बताया कि लक्ष्मण मस्तुरिया और मिथिलेश साहू उनके आदर्श है, उनके गीतों को सुनकर अभ्यास करते हैं।
पुलिस की तत्परता से आठ वर्षीय बालिका तुरन्त मिल गई
राजिम माघी पुन्नी मेला में आठ वर्षीय कु. पुष्पा नवरंगे अपने परिवार सहित आई थी लेकिन घूमते हुए कहीं छूट गई। परिवार लोगो को जैसे ही पता चला कि उनके साथ पुष्पा नहीं है। एक-दूसरे को पूछकर इधर-उधर खोजबीन की पर कहीं नही दिखा। इधर बच्ची अपने परिजनों को न पाकर रोने लगी। इस पर पुलिस जवान की नजर उन बच्ची पर पढ़ी तथा नाम पता पूछने के बाद गुम इंसान जानकर पुलिस कंट्रोल रूम में लाया तथा एनाऊन्समेंट किया गया। आवाज सुनकर परिजन दौड़ते हुए पहुंचे। परशुराम ढ़िढी पिता श्यामलाल ढ़िढी पुराना सतनामी मंदिर के पास वार्ड क्र. 09, नवापारा जिला रायपुर निवासी बताया। उन्होंने बालिका पुष्पा को अपनी सरहद बहन की बेटी बताने पर रात साढे़ दस बजे गवाहों के बीच सुपुर्द किया। पुलिस जवानों की तत्परता एवं सुजबूझ से तुरन्त बच्ची मिल गई।

