Supreme Court on Voting: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली एक PIL पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश नीतिगत दायरे में आता है और न्यायपालिका इसमें कुछ नहीं कर सकती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम.पंचोली की बेंच ने PIL याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर संबंधित पक्षों से संपर्क करें।
कोर्ट ने आगे कहा कि जानबूझकर वोट न डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई की मांग करने वाली और वोटिंग को अनिवार्य बनाने वाली याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि उन लोगों के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाएं जो जानबूझकर वोट डालने से दूर रहते हैं।
CJI ने कहा जरूरत जागरूकता की है, कानून की नहीं
सुनवाई के दौरान, CJI ने कहा कि लोकतंत्र कानूनी दबाव के बजाय जन जागरूकता से फलता-फूलता है। एक ऐसे देश में जो कानून के शासन से चलता है और लोकतंत्र में विश्वास रखता है। जहां हमने 75 सालों से यह दिखाया है कि, हम इस पर कितना भरोसा और विश्वास करते हैं। वहां, हर किसी से यह उम्मीद की जाती है कि वह जाए और वोट डाले। अगर वे नहीं जाते हैं तो, जरूरत जागरूकता की है। इसके लिए हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते।
इसके अलावा CJI ने अनिवार्य वोटिंग कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का भी जिक्र किया और कहा कि चुनाव के दिनों में, जजों सहित कई नागरिकों को काम करना पड़ता है। अब अगर हम इसे मान लेते हैं, तो फिर जस्टिस बागची को वोट डालने के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा, भले ही उस दिन काम का दिन हो। बेंच ने समाज के वंचित वर्गों के प्रति भी चिंता व्यक्त की। बेंच ने याचिका कर्ता पूछा, अगर कोई गरीब व्यक्ति कहता है, मुझे अपनी दिहाड़ी कमानी है, मैं वोट कैसे डालूं, तो हम उनसे क्या कहें।

