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जांच अधिकारी को निलंबित करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण

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पुरूषोत्तम कैवर्त/ कसडोल : ग्राम पंचायत सेमरिया के जाँच अधिकारियो को निलंबित करने एवँ 14 वें वित्त राशि खर्च का निष्पक्ष जाँच की मांग को लेकर युवा नेता अनिल तिवारी के नेतृत्व में उप सरपंच हितेश्वर श्रीवास पंच रविकांत पाठक ग्रामीण जितेंद्र साहू मनबोध साहू आदि जनपद पंचायत कसडोल के सामने अनिश्चित कालीन धरना पर बैठे है । अनील तिवारी एवम हितेश्वर श्रीवास ने बताया कि समीपस्थ ग्राम पंचायत सेमरिया के सरपंच कोरोना काल मे 14 वें वित्त राशि का फर्जी बिल वाउचर बना कर भारी दुरुपयोग किया है । जिसकी शिकायत गत दिनांक 27 अक्टूबर 2020 को जनपद पंचायत कसडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को किया गया है । साथ ही जाँच की मांग करने पर करारोपण अधिकारी द्वय मोहन लाल पैकरा एवम के पी ध्रुव को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया है । उक्त जाँच अधिकारी के समक्ष 5 नवम्बर 2020 को उपस्थित होकर अपना बयान भी दिया हूँ । किन्तु कोई कार्यवाही नही होने पर दिनांक 5 फरवरी 2021 को पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी कसडोल को आवेदन देकर 15 दिवस के भीतर कार्यवाही करने का माँग गया था किंतु कार्यवाही नही होने पर आज 24 फरवरी से धरना पर बैठना पड़ा है जो जाँच कार्यवाही तक जारी रहेगा । राशि का किस प्रकार दुरुपयोग किया गया उदाहरण स्वरूप बताया कि कोरोना काल मे लगभग 450 लोगो को क्वारन टाइन में रखा गया था । जिनके लिये 10 किविंटल 80 किलो नमक लगभग 1 किविंटल पिसी हल्दी 1 किविंटल पिसी मिर्च एवम हरी मिर्च । जगदीश किराना स्टोर्स से डेढ़ लाख रुपये का हरी सब्जियां 20हजार 850 रुपये का सेनेटाइजर जैसे अनेको फर्जी बिल है । अनील तिवारी ने बताया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी बसंत कुमार चौबे धरना स्थल पर आकर पुनः जाँच कराने की चिकनी चुपड़ी बातें कर धरना को समाप्त करने की बात कह रहा था । निलम्बन की मांग करने पर चले गए । धरना के संबंध मुख्य कार्यपालन अधिकारी से सम्पर्क करने पर निलम्बन की कार्यवाही को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर बताया । साथ ही जाँच से आपने एवम कलेक्टर साहब को संतुष्ट बताया है । जाँच अधिकारी के पी ध्रुव ने बताया कि तुरतुरिया मेला का प्रभारी होने के कारण जाँच में शामिल नही था । दुसरा जाँच अधिकारी मोहन पैकरा ने बताया कि अनील तिवारी जाँच में उपस्थित होकर अपना बयान दिया है । ग्रामीणों का कहना है कि 2 जाँच अधिकारी नियुक्त कर 1 अधिकारी से जाँच करना ही मनमानी को प्रदर्शित करता है पुनः जाँच होना चाहिए ।

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