रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) परिसर स्थित उप डाकघर में सामने आए बहुचर्चित बचत घोटाले ने अब और बड़ा रूप ले लिया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस घोटाले में गबन की राशि 20 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और विजिलेंस टीम में बड़ा बदलाव किया गया है।
उपभोक्ता आयोग के फैसले से मची खलबली
हाल ही में राज्य उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित जमाकर्ता अनिल पांडेय के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डाक विभाग को 1.91 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और उच्च स्तर पर जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू हो गई है। शनिवार को प्रधान डाकघर की वरिष्ठ पोस्ट मास्टर पूजा तिवारी को नया एएसपी विजिलेंस नियुक्त किया गया है। वहीं, घोटाले में संलिप्त पाए गए कर्मचारियों को जांच के दायरे में लाकर उनसे पूछताछ तेज कर दी गई है।
PMG ने शुरू की सख्त कार्रवाई
पोस्ट मास्टर जनरल (PMG) अजय सिंह चौहान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। विभागीय स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले से प्रभावित अन्य जमाकर्ता भी अब एकजुट होकर उपभोक्ता आयोग में याचिकाएं दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में डाक विभाग पर आने वाले दिनों में आर्थिक और कानूनी दबाव और बढ़ना तय माना जा रहा है।

