टीकम निषाद/ देवभोग : निजी क्लीनिक के झोलाछाप डॉक्टरों की इलाज से अब तक मरीजों को शारीरिक और आर्थिक नुकसान उठाना तो पढ़ रहा है। मगर अब इसका असर कोरोना टेस्ट में भी देखने को मिल रहा है। क्योंकि शासकीय अस्पताल में गिनती के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं । तो वही निजी क्लीनिक पर मरीजों का तांता लगा होता है। यही कारण है कि देवभोग शासकीय अस्पताल अन्य अस्पताल की तुलना कोरोना टेस्ट कराने में पिछड़ गया है। मतलब निजी क्लीनिक पर शारीरिक नुकसान उठाकर इलाज कराने वाले मरीजों के लिए सरकार की गाइडलाइन का महत्व बिल्कुल भी नहीं है । तभी अधिकांश क्लीनिक में ना दो गज दूरी ना मार्क्स और ना सैनिटाइजर का इस्तेमाल होता है । यह प्रमुख कारण माना जाता है क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज की संख्या मैं बढ़ोतरी होने का क्योंकि मंदिर मस्जिद सहित लगभग शराब दुकान में भी सरकार की गाइडलाइन का पालन क्या जाता है। लेकिन अफसोस की बात है झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक में बिल्कुल भी गाइडलाइन का पालन होते नहीं देखा जाता। बावजूद इसके स्वास्थ्य अमला हाथ पर हाथ धरे नजर आ रहा है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि पूरी वस्तुस्थिति से जिला प्रशासन अच्छी तरह अवगत हैं । लेकिन कार्यवाही करने की जगह स्थानीय प्रशासन पर सारा ठीकरा फोड़कर साफ-साफ बस निकल रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक कोरोना टेस्ट का आंकड़ा बढ़ने में शासकीय अस्पताल प्रबंधन को काफी मशक्कत करने की जरूरत होगी। क्योंकि गांव गांव के भोले भाले मरीज झोलाछाप डॉक्टर के जाल में फंस कर लगभग अस्पताल से दूरी बना लिए हैं ।बावजूद इसके जिम्मेदार मामला को संज्ञान में लेने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
अंजू सोनवानी बीएमओ देवभोग -: कोरोना टेस्ट के डर से भी मरीज अस्पताल नहीं आ रहे हैं और यह भी कारण है कि वह निजी क्लीनिक में अपना इलाज ले रहे हैं

