प्रांतीय वॉच

जीवित किसान को पटवारी द्वारा मृत घोषित कर धान बेचने से किया वंचित 

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जानिसार अख्तर/ लखनपुर। गिरदवारी में शासन के बने धान पंजीयन में सॉफ्टवेयर तथा पटवारियों की लापरवाही के कारण सैकड़ों किसानों की रकबा घटा दी गई है जिससे आए दिन तहसील कार्यालय का चक्कर काटने को मजबूर तहसीलदार के द्वारा संतोषप्रद  जवाब नहीं दिया जा रहा है किसान तहसील कार्यालय का चक्कर काटने को मजबूर । छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा विगत 2 वर्षों में धान खरीदी करने के लिए प्रत्येक वर्ष नई नई नीतियां लाया जा रहा है जिसके तारतम में किसान धान बेचने में काफी परेशानियो का सामना किया जा रहा है वही। रकबा  कम होने से शासन के प्रति जनाक्रोश की भाव किसानों के द्वारा व्याप्त है वहीं इस वर्ष छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा किसानों के लगे फसल की निरीक्षण कर गिरदावरी करने का फैसला लिया था जिसमें राजस्व अमले के पटवारी सहित तमाम आला अधिकारियों के द्वारा गिरदावरी किया गया जिसमें किसानों की अधिकतम रकबा  तथा कई किसानों का 0 रकबा भी कर दिया गया तथा कई किसानों को पटवारियों की लापरवाही के कारण जीवित किसान को मृत घोषित भी किया जा चुका है इसी तारतम्य जीता जागता उदाहरण लखनपुर विकासखंड के धान खरीदी केंद्र समिति चांदो के ग्राम ईरगवा के किसान   सोमवार साय पिता जगमोहन  को पटवारी रणजीत बैक के द्वारा किसानों की सूची खरीफ फसल की 2020 21 की प्रपत्र में मृत  घोषित कर उसकी जानकारी धान खरीदी केंद्र में दे दी गई पटवारी की इस लापरवाही मैं महेश ना ही उक्त किसान की मृत्यु प्रमाण पत्र चाही गई और ना ही आसपास के किसानों से एवं गांव के सरपंच और से पुस्तक नहीं की गई जिसके कारण किसान का रकबा एवं धान खरीदी पंजीयन से हटा दिया गया वही किसान तहसील कार्यालय में दो-तीन दिन भटकता रहा जिससे कुछ लोगों से मुलाकात कर उसकी बातें एसडीएम प्रदीप साहू से सारी बातें एवं आवेदन दी गई तथा उक्त पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आश्वासन एसडीएम के द्वारा दी गई। वही तस्वीर कलर में किसान लगातार कार्यालय का चक्कर काटते नजर आ रहे हैं तथा तहसीलदार के द्वारा किसानों को सही जानकारी नहीं दिया जा रहा है क्योंकि शासन के द्वारा रखवा सुधार करने के लिए आवेदन देने का झूठा प्रलोभन एम्प्रोब गंडा किया गया है जिससे किसान काफी नाराज हो आक्रोशित हैं ।  तहसीलदार की कार्य प्राणियों पर भी किसानों एवं आम जनों के द्वारा प्रश्न चिन्ह उठाए जा रहे हैं बताया जाता है कि मुख्यालय में नहीं रहने एवं समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने से किसान तहसील कार्यालय का चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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