
पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ**
भारतीय संस्कृति के दो निर्माता
यज्ञ पिता ,गायत्री माता
बिलासपुर/ निर्मल सिंह – आदिशक्ति मां गायत्री परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीय माता जी के सूक्ष्म संरक्षण में महिमा नगर सिरगिट्टी वार्ड क्रमांक 10 , में 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें शांतिकुंज प्रतिनिधि के रूप में श्री राम कुमार श्रीवास बाबूजी की टोली द्वारा यज्ञ एवं संस्कार करवाया गया। भव्य कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ महिमा नगर के पार्षद श्री पुष्पेंद्र साहू जी के पिता एवं कांग्रेस सदस्य श्री पवन साहू जी और उनकी धर्मपत्नी द्वारा किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छाया विधायक एवं कृषि उपज मंडी समिति बिलासपुर अध्यक्ष श्री राजेंद्र शुक्ला जी की उपस्थिति रही ,आदरणीय शुक्ला जी ने संस्कार के महत्व को बताते हुए गायत्री परिवार को विशेष साधुवाद दिया, संस्कारित समाज एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण करता है ।दीप महायज्ञ के माध्यम से नई ऊर्जा का संचार किया गया, पांच कुंडीय गायत्री यज्ञ में पुंसवन संस्कार ,मुंडन ,विद्यारंभ संस्कार दीक्षा संस्कार तथा विभिन्न संस्कारों को नि:शुल्क यज्ञ के माध्यम से संपन्न कराया गया , यज्ञ में सुबह योग करवाया गया, जिस पर नगर वासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। यज्ञ में मुख्य अतिथि के रूप मे गायत्री परिवार की नारी जागरण प्रभारी श्रीमती आशा सुल्तानिया दीदी द्वारा आदर्श जीवन और आज के युग में नारी के कार्यों और महत्व को बताते हुए उन्हें समाज के उत्थान के लिए नई प्रेरणा , मार्गदर्शन दिया गया ,गायत्री शक्तिपीठ विनोबा नगर के मुख्य ट्रस्टी श्री हेमराज वैश्य बाबू जी द्वारा कर्मफल के सिद्धांत पर विशेष उद्बोधन दिए गए। कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति धर्म संरक्षण सदस्य श्री भृगु अवस्थी भैया जी की उपस्थिति रही।कार्यक्रम की व्यवस्था सहयोग हेतु महिमा नगर वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद श्री रवि साहू जी, महिमा नगर वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद श्री पुष्पेंद्र साहू जी का विशेष सहयोग रहा, कार्यक्रम महिमा नगर सिरगिट्टी बिलासपुर की गायत्री महिला मंडल **श्रीमती लक्ष्मी नेताम श्रीमती भानुमति उईके और उनकी महिला सदस्यों **, गायत्री प्रज्ञा पीठ रेल्वे क्षेत्र के समन्वयक श्री होमसिंह साहू भैया और उनके सदस्यों के सहयोग से संपन्न हुआ। हमारे मिशन का मुख्य उद्देश्य संस्कारों के माध्यम से ब्यक्ति निर्माण परिवार निर्माण समाज निर्माण एवं राष्ट्र के नवनिर्माण में योगदान देना मनुष्य में देवत्व का उदय तथा धरती पर स्वर्ग का अवतरण।
